NEW DELHI: 10 सितंबर 2022 यानी कि आज से पितृपक्ष शुरू हो रहा है, जो 25 सितंबर 2022 तक चलेगा। सनातन धर्म में पित्र पक्ष का बेहद खास महत्व होता है।माना जाता है कि पितृपक्ष के दौरान पितृ धरती पर आकर अपने परिवार के सदस्यों को आशीर्वाद देते हैं। पितृपक्ष में पितरों को प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। इस दौरान उनकी तिथि के अनुसार उनका तर्पण किया जाता है और साथ ही उनकी पसंद का भोजन भी बनाया जाता है। पितृपक्ष के दौरान ब्राह्मणों को भी भोजन करवा कर दान दिया जाता है। इस दौरान पितरों के नाम पर कौओं को भोजन करवाया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि हिंदू धर्म में कौओं को पितरों का दर्जा दिया गया है। हिंदू धर्म में पितृपक्ष के दौरान या फिर किसी भी शुभ कार्य में पितरों को याद करते हुए कौओं को भोजन करवाया जाता हैं। ऐसे में आपके दिमाग में भी यह सवाल तो जरूर आता होगा कि आखिर पितृपक्ष में कौैऔं को ही भोजन क्यों करवाया जाता है और इसका महत्व क्या है? तो आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्यों माना जाता है कौओं को पितृ?

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष के दौरान पितृ कौओं के रूप में धरती पर आते हैं। शास्त्रों में इस बात का वर्णन है कि कोए ने देवताओं के साथ अमृत को चखा था, जिसके बाद से यह मान्यता है कि कभी भी कौओं की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से नहीं होती। कौए बिना थके लंबी दूरी तक यात्रा करने ने सक्षम होते है। यही वजह है कि कोई भी आत्मा कौओं के शरीर में आसानी से वास कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकती है। वही धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्यक्ति की मौत के बाद उसका जन्म कौआ योनि में होता है। इन्हीं कारणों की वजह से पित्र पक्ष में कौओं के जरिए पितरों को भोजन कराया जाता है।

पित्र पक्ष में को को भोजन कराए जाने की कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार, इंद्रदेव के बेटे जयंत ने कोए का रूप धारण किया था। इस कोए ने एक दिन माता सीता के पैरों में चोंच मार दी, उस समय भगवान राम जी यह पूरी घटना देख रहे थे, जिसके बाद राम ने एक तिनका चलाया जो कौए की आंख में लग गया। कौवे की आंख में तिनका लगने से उसकी वह आंख खराब हो गई, जिसके बाद कौए ने श्रीराम से अपनी गलती की माफी मांगी। कौए की माफी से प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम ने उसको यह आशीर्वाद दिया कि पितृपक्ष में कौवे को दिया गया भोजन पितृ लोक में निवास करने वाले पितर देवों को प्राप्त होगा।

कौओं के अलावा इन्हें भी कराया जाता है पितृपक्ष में भोजन

पितृपक्ष के दौरान कौओं को भोजन कराने के अलावा कुत्तों और पक्षियों को भी भोजन कराया जाता है। कहा जाता है कि यदि इन जानवर और पक्षियों द्वारा भोजन स्वीकार नहीं किया जाता तो यह पितरों की नाराजगी का संकेत होता है।

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