ब्यूरो ऑफ लेबर स्टेटिस्टिक्स के मुताबिक, एक पार्ट टाइम जॉब करने वाले कैंडिडेट से एक हफ्ते में ३५ घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकता है। कुछ कंपनियों की गाइडलाइन के मुताबिक, यह समय सीमा इससे कम हो सकती है।

अक्सर देखा जाता है कि लोग पार्ट टाइम जॉब करते समय अपनी स्टडी या दूसरे कामों के साथ तालमेल बिठाते हैं। लेकिन कई बार पार्ट टाइम जॉब के वर्किंग ऑवर्स इतने बढ़ा दिए जाते हैं कि कर्मचारी के दूसरे काम प्रभावित होने लगते हैं। नतीजा, या तो जॉब को छोडऩा पड़ता है या फिर दूसरे काम रुक जाते हैं। ऐसी स्थिति न बने इसके लिए कुछ बातों को समझने की जरूरत है। जैसे-पार्ट टाइम जॉब में कितने वर्किंग ऑवर होते हैं, जिस कंपनी या फर्म में आप पार्ट टाइम जॉब कर रहे हैं, वहां इसको लेकर क्या नियम हैं। सबसे पहले समझते हैं कि पार्ट टाइम जॉब के मायने क्या हैं? किसी भी कंपनी में जॉब करने की तीन कैटेगरी होती हैं, जैसे-पार्ट टाइम, फुल टाइम, फ्रीलांस आदि। इसी का हिस्सा होती है पार्ट टाइम जॉब। इसको लेकर वर्किंग ऑवर्स भी तय किए गए हैं।

अ मरीका के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टेटिस्टिक्स के मुताबिक, एक पार्ट टाइम जॉब करने वाले कैंडिडेट से एक हफ्ते में ३५ घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकता। हालांकि यह अधिकतम सीमा है। कुछ कंपनियों की गाइडलाइन के मुताबिक, यह समय सीमा इससे कम हो सकती है। एक्सपट्र्स कहते हैं, पार्ट टाइम जॉब से पहले अपनी जॉब प्रोफाइल को अच्छी तरह से समझ लें। इसके मुताबिक यह तय करें कि वो जॉब कितनी सही है। पार्ट टाइम जॉब का मतलब यह नहीं है कि आप मेडिकल या फैमिली लीव नहीं ले सकते है, पहले इस बारे में बात कर लें।

ये बातें भी ध्यान रखें
कई बार जॉब के दौरान पार्ट टाइम वर्कर्स को फुलटाइम वर्कर्स के हिस्से का काम भी दे देते हैं। इससे धीरे-धीरे पार्ट टाइम वर्किंग के ऑवर्स बढ़ जाते हैं। ऐसा होने पर मैनेजर से बात करें और विनम्रता के साथ फिक्स वर्किंग ऑवर्स के मुताबिक काम करने की बात कहें। एक जरूरी बात यह भी है कि पार्ट टाइम जॉब की शुरुआत करते समय आपको जो भी डॉक्यूमेंट मिलते हैं उसे पूरा पढ़ें और समझें। मन में सवाल उठने पर एचआर मैनेजर से उसका जवाब पूछें। पूरी तरह से आश्वस्त होने पर ही जॉब के लिए हां बोलें। इस तरह कुछ बातें पार्ट टाइम जॉब शुरू करने से पहले समझनी जरूरी हैं।

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