लाखों भारतीय एसएमई व्यवसायों की समस्याओं को हल करने पर केंद्रित ऐप, पगारबुक का उद्देश्य भारत में एसएमई के लिए वर्कफोर्स मैनेजमेंट को डिजिटल बनाना है। १२ से अधिक भाषाओं में उपलब्ध इस ऐप को फिलहाल ३० लाख एसएमई यूजर प्रयोग कर रहे हैं। इससे कंपनी, ऑफिस या किसी संस्थान में कर्मचारियों के वेतन का प्रबंधन संभव है। खास बात है कि सैलेरी से जुड़ा हिसाब-किताब मोबाइल और कम्प्यूटर, दोनों पर आसानी से उपलब्ध होगा। इसमें अटेंडेंस, एडवांस या ओवरटाइम आदि को मैनेज कर सकते हैं।

वजह बनी आधार
एसएमई के बड़े हिस्से को एक समाधान की आवश्यकता को देखते हुए पगारबुक की नींव रखी। विक्रेताओं के लिए बहीखाता तैयार करने के अलावा वसूली बनाए रखना, चालान और सूची प्रबंधन, जीएसटी भुगतान, स्टाफ का वेतन, कार्य और उपस्थिति के प्रबंधन यह उपयोगी होगा।

गुणवत्ता में सुधार
प गारबुक पर वर्तमान में १५ मिलियन से ज्यादा कर्मचारी रजिस्टर्ड हैं। इनमें से ८० फीसदी से अधिक एसएमई गैर- थोक/ खुदरा व्यवसाय हैं। इससे गैर मेट्रो लोगों के जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार होगा।

२०१९ में शुरू किया गया पगारबुक, सिकोइया कैपिटल व इंडिया कोशेंट की ओर से फंड किया गया मोबाइल प्रथम पेरोल व वर्कफोर्स मैनेजमेंट ऐप है।

१५ मिलियन
ज्यादा कर्मचारी रजिस्टर्ड हैं पगार बुक ऐप पर वर्तमान में।

ऐसे करें पंजीकरण
प गारबुक को गूगल प्ले स्टोर और या फिर इसकी ऑफिशियल वेबसाइट, दोनों के जरिए डाउनलोड कर सकते हैं। पगार बुक ऐप डाउनलोड होने के बाद इसे इंस्टॉल करें और ओपन होने के बाद रजिस्ट्रेशन संबंधी कार्यों को पूरा करें।

स्थापना
पगारबुक की स्थापना बेंगलुरू में दिसंबर २०१९ में आदर्श कुमार, आर्य आदर्श गौतम और रूपेश कुमार मिश्रा ने की थी। उन्होंने पहले गैर अंग्रेजी बोलने वाले इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए ज्ञानपीठ, भारत का पहला ज्ञान साझाकरण मंच बनाया।

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