वर्तमान स्थितियों को देखते हुए ज्यादातर कंपनियों ने कर्मचारियों को ऑफिस बुलाने का फैसला टाल दिया है। कोरोनाकाल में प्रजेंटेशन ऑफिस कल्चर का अहम टूल बन गया है, अगर आप भी घर पर प्रजेंटेशन तैयार करते हैं और पेश करते हैं, कुछ बातें ध्यान रखें…

कोरोना काल में जूम और गूगल मीट पर मीटिंग का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। वीकली और मंथली होने वाली मीटिंग्स में अक्सर प्रजेेंटेशन के जरिए बात रखी जाती है। इससे दूसरे शहर में बैठे इंसान भी आपकी बात को बेहतर समझ पाते हैं। अगर आप भी प्रजेंटेशन तैयार करते हैं और वर्चुअल मीटिंग में पेश करते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। छोटी-छोटी बातें आपकी प्रजेंटेशन को आकर्षक बनाने के साथ इससे जुड़ी जानकारी हर टीम मेम्बर को समझने में मदद करती हैं। बेहतर प्रजेंटेशन वही होती है, जो अपनी बात को दूसरों तक पहुंचाए। जानिए, ऐसी ही कुछ अहम बातें, जो आपकी प्रजेंटेशन को प्रभावी बनाती हैं…

एक बार रिहर्सल जरूरी
वर्चुअल मीटिंग से पहले ही कुछ बातों को तय कर लें। जैसे- प्रजेंटेशन देने का मकसद क्या है, जिनके सामने प्रजेंटेशन को पेश करना चाहते है उनसे क्या उम्मीद रखते हैं और इसे पेश करने के लिए मानसिक तौर पर आप कितने तैयार हैं। इन सभी बातों पर गौर करें और प्रजेंटेशन की रूपरेखा तैयार करें। एक बार पूरी तैयारी होने पर इसकी रिहर्सल करें। मान लें कि पूरी टीम ऑनलाइन मीटिंग में शामिल हो चुकी है, अब आप अपनी बात को रखने की शुरुआत कैसे करेंगे, वो बोलें। इस तरह आप यह समझ पाएंगे कि आप वाकई में कितने तैयार हैं।

ये बातें ध्यान रखें
एक बात जिस पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, वह है कॉन्फिडेंस। इंसान के बोलने और समझाने के तरीके से आपका कॉन्फि डेंस साफतौर पर झलकता है।
ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, प्रजेंटेशन देते समय में चेहरे पर उत्साह नजर आना चाहिए। ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगना चाहिए कि प्रजेंटेशन देकर आप सिर्फ अपनी बात रखकर किनारे हो जाना चाहते हैं।
अपनी बात समझाते समय कलीग्स से सवाल-जवाब करने के लिए भी कह सकते हैं। इससे पता चलता है कि उन्हें आपकी बात कितनी समझ आ रही है और आपकी प्रजेंटेशन कितनी प्रभावी बनी है।
अमेरिक न मार्केटिंग स्पेशलिस्ट गाय टेकियो का कहना है कि अगर आप अपनी प्रजेंटेशन को प्रभावी बनाना चाहते हैं तो १०-२०-३० नियम पालन जरूर करें।
१०-२०-३० नियम का मतलब है, आपकी प्रजेंटेशन में १० से ज्यादा स्लाइड नहीं होनी चाहिए। यह २० मिनट से ज्यादा लम्बी नहीं खिंचनी चाहिए और फॉन्ट का साइज ३० पॉइंट से कम बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
प्रजेंटेशन देते समय आपके पास उससे जुड़ा कोई छोटा सा किस्सा या उदाहरण है, तो उसे भी पेश करें। उदाहरण और किस्से भी आपकी प्रजेंटेशन को समझने में मदद करते हैं।

लास्ट में मैसेज दें
प्र जेंटेशन के लास्ट में एक मैसेज जरूर दें। ४५ से ६० सेकंड में पूरी प्रजेंटेशन को एक बार बयां कर दें। यह करने के बाद टीम मेम्बर्स से सवाल-जवाब करने के लिए कहें। सवाल-जवाब के जरिए यह समझ सकेंगे कि टीम मेम्बर्स को आपकी बात कितनी समझ आई या प्रजेंटेशन में कितनी कमियां थीं, जिन्हें सुधारने की जरूरत है। इसके अलावा अगर कोई ऐसी बात आपके जेहन में आई है जो प्रजेंटेशन में नहीं कह पाए, तो सीधे तौर पर अपने कलीग्स से कह सकते हैं, बिल्कुल भी न हिचकें।

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