राजस्थान मोटर गैराज की तरफ से आयोजित की जाने वाली नीलामी में वाहन सभी विभागों के होते हैं। अधिकारीयों की गाड़ियां भी नाकारा होने पर यहीं नीलाम होती है। नाकारा का मतलब यह नहीं है कि वह अब चल नहीं सकती। कार, बाइक, ट्रक और बस को खरीदने के बाद आपको सिर्फ थोड़ा सा पैसा लगाना होगा। मशीन में खराबी आने और विभागों में पड़ी रहने की वजह से भी गाड़ियां ऑक्शन में पहुँच जाती है।

कार खरीदने के लिए कोई भी आम आदमी जा सकता है। क्योंकि पहले तो दलाल जाते थे, जो मनमर्जी के भाव में एक साथ सभी गाड़ियों को लोहे के भाव में खरीद लाते थे। लेकिन अब एक व्यक्ति सिर्फ एक ही कार या बाइक ले सकता है। नीलामी में पहले मोटर गेराज में जाना होता है। और वहां निर्धारित खिड़की पर जाकर एक फॉर्म लेना होता है और उसे भरकर जमा कराना होता है। इसके लिए निर्धारित शुल्क जो बाइक और कार के लिए अलग होता है, उसका भुगतान करना होता है। शुल्क 1000 रूपए के करीब होता है ,जिसके बाद आपको टोकन मिलेगा, जो नीलामी में भाग लेने के लिए दिया जाता है।

कार/बाइक आने के बाद आपको उसे देखना होता है और नियत राशि से ऊपर बोली लगानी होती है। बोली कितनी भी जा सकती है। अगर किसी कार की बोली 20 हजार से शुरू होती है और 22 हजार पर आपके नाम छूट जाती है, तो आपको उसके बाद तुरंत एनओसी दे दी जाती है। आवेदन फॉर्म के साथ आपको आधार कार्ड की कॉपी भी सबमिट करनी होती है।

जिप्सी की कीमत अच्छी जाती है। क्योंकि नीलामी में युथ अपने क्रेज के अनुसार जिप्सी को ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसे में 40-60 हजार से शुरू होने वाली नीलामी डेढ़ लाख तक भी पहुँच जाती है। बाइक को बहुत कम खरीदने वाले होते हैं, ऐसे में बाइक की कीमत महज 2 हजार से 5 हजार तक ही सिमट जाती है। एम्बेस्डर और फिएट जैसी गाड़ियां तो 20 हजार के शुरुआती बोली पर ही नीलाम हो जाती है।

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