जॉब करने वाले ६० फीसदी लोग आमदनी का कुछ हिस्सा बचाने पर फोकस करते हैं, लेकिन आए दिन बढ़ते खर्चों के कारण बचत का विचार छोडऩा पड़ जाता है। ऐसे में जरूरी है कि खर्चों के साथ सेविंग की प्लानिंग मजबूत की जाए। जानें उपयोगी टिप्स-

छोटी हो सेविंग
बचत को लेकर दिमाग में सेट होता है कि जितना सेव करेंगे, मैच्योरिटी के समय पैसा ज्यादा मिलेगा। यदि आपकी आमदनी कम है, तो आप छोटी-छोटी किश्तों के रूप में मासिक तौर पर बचत कर सकते हैं। पहले छोटी राशि के रूप में २००-५०० रुपए मासिक बचाएं।

खर्चों को सीमित करें
मध्यम वर्ग में वैसे तो खर्चों का कभी अंत नहीं होता है, लेकिन जहां आप बचत कर सकते हैं वहां प्रयास जरूर करें। जब तक कोई काम अनिवार्य न हो या जब तक किसी चीज की अत्यंत जरूरत महसूस न करें, तब तक उस पर पैसा बरबाद न करें। हर माह कुछ पैसा बचाने के बाद ही किसी चीज में इन्वेस्ट करें।

कुछ पैसा नजरअंदाज करें
आमतौर पर माना जाता है कि घर एक ऐसी जगह है, जहां खर्चे कभी खत्म नहीं होते। ऐसे में आप चाहें, तो अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा नजरअंदाज करके चलें। ताकि जो भी बचे, उसी में जिम्मेदारियों को निभाने का विचार बना सकें। उस पैसे को आप अकाउंट में सेव कर सकते हैं।

किश्त का रूप दें
आमतौर पर आमदनी में से कुछ हिस्सा किसी न किसी किश्त के लिए तय होता है। आप चाहें, तो यदि कोई किश्त नहीं चल रही है, तो भी आमदनी में से कुछ हिस्सा किश्त के नाम से बचत खाते में जमा करते रहें। यह एक ऐसा तरीका है, जिसके लिए आप जिम्मेदारी से पैसा बचा पाएंगे।

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