Covid Sample Test: अब मोबाइल स्क्रीन से भी कोविड की जांच के लिए सैम्पल लिए जा सकेंगे। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने जांच का यह तरीका विकसित किया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि सांस छोडऩे के दौरान संक्रमित इंसान के मुंह से सैकड़ों वायरस निकलते हैं। वायरस के ये कण मोबाइल स्क्रीन पर पहुंचकर जांच के ८१ से १०० फीसदी तक सटीक नतीजे दे सकते हैं।

ऐसे लेते हैं सैम्पल
फोन की स्क्रीन पर मरीज सांस छोड़ता है। ऐसा करने पर वायरस के कण मुंह और नाक से निकलकर स्क्रीन पर आ जाते हैं। स्क्रीन पर मौजूद कणों का स्वाब स्टिक की मदद से सैम्पल लिया जाता है, फिर इसे लैब में भेजा जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है, आमतौर पर नाक और मुंह से लिए जाने वाले सैम्पल देते वक्त मरीज असहज महसूस करते हंै, लेकिन जांच के नए तरीके से सैम्पल देना आसान है। यह ८१ से १०० फीसदी तक स्टीक परिणाम देता है और मरीज परेशान भी नहीं होता।

कोविड-१९
जांच के नए तरीके से
सैम्पल लेना बेहद आसान है

ये हैं कुछ चुनौतियां
वैज्ञानिकों का कहना है, इस तरह की टेस्टिंग में कई चुनौतियां भी हैं। जैसे- एसिम्प्टमैटिक मरीजों की जांच कितनी सटीक होगी या कोई इंसान झूठ बोलता है कि वो संक्रमित है। वैज्ञानिकों का कहना है, आमतौर पर आरटीपीसीआर टेस्ट की रिपोर्ट आने में २४ घंटे लगते हैं, लेकिन जांच के इस नए तरीके से मरीज की रिपोर्ट ८ घंटे में दी जा सकती है।

इस जांच को विकसित करने वाले यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन का मानना है कि आरटी-पीसीआर के मुकाबले इस नए तरीके से नतीजे कम समय में आते हैं।

जल्द ही इसकी किट लॉन्च होगी
फो न स्क्रीन टेस्टिंग के जरिए दक्षिणी अमरीकी देशों के स्कूलों और ऑफिसेस में जांच कराई जा चुकी है। इस रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिक कहते हैं, नई जांच की किट को मार्केट में उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इसे खासतौर पर स्कूलों को कम दाम में उपलब्ध कराया जाएगा ताकि आमतौर पर होने वाले रैपिड टैस्ट की संख्या को कम किया जा सके। गौरतलब है कि रैपिड टैस्ट में परिणाम १०० फीसदी सटीक नहीं होते हैं। इसलिए नई किट कारगर साबित हो सकती है।

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