गैजेट्स बेहद नाजुक होते हैं। जरा सी लापरवाही होने पर ये डैमेज हो जाते हैं। ऐसे डैमेज की भरपाई के लिए गैजेट इंश्योरेंस एक बेहतरीन विकल्प है, जो पैसे की बचत भी करता है और नुकसान के तनाव से दूर रखता है।

र इंसान की लाइफ मेंं गैजेट्स की संख्या बढ़ रही है। सुविधाओं के साथ इनकी कीमत में भी बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में इनके टूटने, चोरी होने और खराब होने पर बड़ा झटका लगता है। इन परेशानियों से बचने के लिए गैजेट्स का इंश्योरेंस करा सकते हैं। यह इंश्योरेंस इसलिए भी जरूरी है क्योंकि गैजेट बनाने वाली कंपनियां अपने प्रोडक्ट पर सिर्फ छह माह से एक साल तक ही वारंटी देती हैं। इसके बाद हुए नुकसान की भरपाई खुद करनी पड़ती है।

क्यों जरूरी है गैजेट इंश्योरेंस
एक्सपट्र्स कहते हैं, गैजेट्स के टूटने या चोरी होने जैसे नुकसान होने पर यूजर को काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। ऐसे खर्च से बचने के लिए गैजेट इंश्योरेंस करा सकते हैं। कई इंश्योरेंस कंपनियां गैजेट्स के टूटने से लेकर चोरी जैसी घटनाओं से हुए नुकसान तक की भरपाई के लिए प्लान देती हैं। ऐसी घटना होने पर यूजर इंश्योरेंस कंपनी से नुकसान की भरपाई के लिए क्लेम कर सकता है।

ये होता है कवर
इश्योरेंस में गैजेट्स का चोरी हो जाना, टूटना, टेक्निकल खराबी, टच स्क्रीन में गड़बड़ी जैसी बातें कवर की जाती हैं। ऐसा होने पर यूजर को ४८ घंटे के भीतर इंश्योरेंस कंपनी को सूचित करना होता है। क्लेम करने में देरी करते हैं तो इंश्योरेंस की राशि मिलने में समय लग सकता है या दिक्कत आ सकती है।

कब नहीं मिलेगा पैसा
गैजेट्स को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने, बारिश के पानी से भीगने या पॉलिसी लेने से पहले ही गैजेट्स में खराबी रही है तो आपको क्लेम की राशि नहीं मिलेगी। इंश्योरेंस के लिए क्लेम करने जा रहे हैं तो कुछ डॉक्यूमेंट्स आपके पास होने चाहिए। जैसे- गैजेट की ओरिजनल रसीद, इंश्योरेंस पॉलिसी नम्बर और आपका गैजेट चोरी हुआ है तो एफआइआर की कॉपी।

कितने रुपए का कराएं बीमा
उदाहरण के लिए, १० से १५ हजार रुपए वाले मोबाइल का एक साल के लिए १५००, दो साल के लिए २७०० और तीन साल के लिए बीमा कराते हैं तो ३५०० रुपए देना पड़ सकता है। ३५ से ५५ हजार के लैपटाप के लिए एक साल का बीमा कराते हैं तो ४३२० रुपए देना पड़ सकता है। अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनियों के प्लान और राशि अलग-अलग हो सकती है।

ये बातें ध्यान रखें
कई कंपनियां रिपेयरिंग के लिए गैजेट्स की डोर स्टेप पिक और ड्रॉप सुविधा देती हैं। वहीं, कुछ कंपनियां ईयर जैक और चार्जिंग पोर्ट को भी कवर करती हैं। गैजेट इंश्योरेंस से जुड़ी कई ऐसी पॉलिसी भी होती हैं, जिसमें एक से अधिकक्लेम किए जा सकते हैं। इसलिए इंश्योरेंस पॉलिसी लेते वक्तसभी शर्तें पढ़ें भी और मन में सवाल उठने पर पूछें भी।

ऐसे करें क्लेम
पहले इंश्योरेंस कंपनी के टोल-फ्री नम्बर पर कॉल करके बताएं कि गैजेट्स के साथ किस तरह का नुकसान हुआ है। फिर क्लेम फार्म भरकर इंश्योरेंस कंपनी को भेजना होगा। इसे ऑनलाइन भी भेज सकते हैं। गैजेट चोरी हुआ है तो पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई एफआइआर की कॉपी दिखानी होगी। अगर गैजेट डैमेज हुआ है तो इंश्योरेंस कम्पनी की तरफ से आने वाले अधिकारी को उसकी फोटो भी देनी पड़ेेगी। ध्यान रखें कि इंश्योरेंस कंपनी से कोई बात न छिपाएं।

५५ हजार रुपए तक के मोबाइल के लिए ४३२० रुपए तक सालाना प्रीमियम देना पड़ सकता है।

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