राजस्थान में शादी ब्याव के जीमण से ज्यादा तो भण्डारे होते हैं। राजस्थान में भण्डारे का मतलब है कि आपके कान तक बात पहुंचनी चाहिए। मतलब आज भण्डारा कहां है, चलो चलते हैं। बाबा के भंडारे में हजारों श्रद्धालु भोजन प्रसादी लेते हैं। लेकिन कई भंडारे ऐसे भी होते हैं जिन्हे देखने के लिए लोग दूर दूर से आते हैं। लोगों को यह जानने की भी इच्छा होती है कि यहां व्यवस्था कैसे हो पाती होगी। लेकिन बाबा में आस्था रखने वाले भक्तों कहना है कि हम कुछ नहीं करते। जो कुछ भी करने वाला है वो बाबा खुद है।

जयपुर की कोटपूतली तहसील के कल्याणपुरा गांव में पहाड़ी पर विराजमान भैरव बाबा का 13वां वार्षिकोत्सव 30 जनवरी यानी आज मनाया जा रहा है। इस वार्षिकोत्सव में भैंरू बाबा के मेले का आयोजन होगा। इस लक्खी मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सेवा के लिए यहाँ के भक्त एक माह से तैयारियों में लगे हैं। भोजन प्रसादी को देख हर कोई अचंभित रह जाए। 242 क्विंटल चूरमे को बनाने के लिए थ्रेसर की मदद लेनी पड़ी। चूरमें में चीनी मिलाने के लिए जेसीबी लगाई जाती है और चूरमे को भण्डार जगह तक ले जाने के लिए 6 ट्रालियों में भरा गया है।

राजस्थान में भण्डारे की बड़ी प्रसादी

भैरव बाबा मंदिर के पुजारी रोहिताश बोफा के मुताबिक, भैरूंबाबा के 242 क्विंटल चूरमे का भोग लगाया गया है। यह प्रसादी जितने भी श्रद्धालु आएँगे उन्हें बैठाकर जिमाया जाएगा। इस प्रसादी में 135 क्विटंल गेंहू का मोटा आटा व सूजी चूरमे के लिए। 24 क्विंटल देसी घी चूरमें में मिलाने के लिए। 70 क्विंटल बुरा चीनी, 5 क्विटंल मावा यह भी शुद्ध होता है, 2 क्विंटल काजू टुकड़ी, 2 क्विटंल बादाम टुकड़ी, 2 क्विंटल किशमिश और 2 क्विटंल खोपरे का बुरादा इसमें मिलाया जाता है। चूरमे के बाटे पीसने के लिए थ्रेसर मशीन काम में ली जाती है और खांड मिलाने के लिए जेसीबी रहती है।

हलवाई की 85 लोगों की बड़ी सारी टीम

चूरमे को बनाने में गाँव वाले पूरा सहयोग देते हैं। और 85 हलवाईयों की बड़ी सारी टीम भी होती है। चूरमें के साथ दाल भी बनाई जाती है। इसमें चूरमें के साथ 65 क्विंटल दही तथा 60 क्विंटल दाल भी बनाई जाती है। दाल बनाने में 30 पींपे 15 किलो वाले सरसों का तेल, 5 क्विंटल लाल टमाटर, 2 क्विंटल हरी तीखी मिर्ची, 1 क्विंटल ताजा हरा धनिया लिया जाता है।

दाल के लिए 60 किलो लाल मिर्च
दाल बनाने के लिए 60 किलो पिसी हुई लाल मिर्च, 60 किलो पीसी हुई हल्दी, 40 किलो कच्चा जीरा छौंक के काम में लिया जाता है। दही-चूरमे का भोग भैंरू बाबा को लगाया जाता है। इसके बाद श्रद्धालु दही-चूरमा और दाल की प्रसादी पाते हैं। प्रसादी के लिए भारी संख्या को देखते हुए डेढ़ लाख से अधिक पत्तल व दौना मंगवाए हैं। चाय व कॉफी के लिए 4 लाख कप के पैकेट मंगवाए गए हैं।

लक्खी मेले में हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा
शनिवार सुबह भैरव बाबा के मंदिर से कलश यात्रा निकाली गई। वार्षिकोत्सव पर आज 30 जनवरी रविवार को भण्डारा व दिन के समय लोग अलग-अलग झुण्ड बनाकर धमाल कार्यक्रम आयोजित करते हैं। भैरव बाबा के मंदिर में बड़े बड़े कलाकार धमाल की प्रस्तुति देते हैं। भैरू बाबा के मन्दिर पर भोग लगाते वक्त हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा सभी के लिए आकर्षण का केंद्र रहे गई।

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