थ्री-डी प्रिंटिंग तकनीक ने खिलौनों व कपड़ों से लेकर मानव ऊतक तक हर चीज के बनाने के तरीकों को बदल दिया है। थ्री-डी वस्तु को प्रिंट करने की प्रक्रिया को एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग कहते हैं। यह एक कम्प्यूटर प्रोग्राम है, जो प्रिंटर को यह बताता है कि ठोस वस्तु के निर्माण में पतली परतों को कहां लगाया जाए।

धुनिकता की दौड़ में आजकल हर कोई एक्सपेरिमेंट करने में लगा है। शिक्षा के क्षेत्र के अलावा निर्माण क्षेत्रों में प्रोजेक्ट की बात हो और फिर किसी ठोस वस्तु बनाने की सोच, थ्री-डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का प्रयोग बेहद बढ़ गया है। थ्री-डी प्रिंटिंग प्लास्टिक, धातु, लकड़ी, सिंथेटिक फाइबर आदि कई चीजों को ठोस रूप में बदल देती है। इंटरनेट पर मौजूद कई लोग रेडीमेड प्रोग्राम और डिजिटल प्रोग्राम के जरिए थ्री-डी प्रिंट ले सकते हैं।

प्रक्रिया में परतें होती हैं लागू
थ्री-डी प्रिंटिंग प्रक्रिया एक-एक करके परतों को लागू करने के बारे में है लेकिन हर थ्री डी प्रिंटेड वस्तु कम्प्यूटर प्रोग्राम में थ्री डायमेंशनल ब्लूपिं्रट के रूप से शुरू होती है। कुछ विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से अपने खुद के थ्री डायमेंशनल प्रिंट को डिजाइन कर सकते हैं। इसके अलावा रेडीमेड डिजाइन को डाउनलोड भी कर सकते हैं। मॉडल पाने के बाद किसी प्रोग्राम से फाइल को हजारों सतहों से प्रिंट होने से पहले तैयार किया जाता है।

ऐसे काम करती है
यदि आप किसी ऐसी वस्तु के बारे में सोचते हैं जो विशेषकर प्लास्टिक है तो आसानी से उसका थ्री डी प्रिंट करने में सक्षम हैं। इसके अलावा आप थ्री डी प्रिंटिग तकनीक के जरिए खिलौने, गहने, मॉडल, फोन के कवर आदि को आसानी से बनाने की सोच सकते हैं। थ्री डी प्रिंटिंग से जुड़ी कई ऐसी वस्तुएं हैं जैसे गिटार, करघा, लेजर के साथ जुड़े गिलास और नायलॉन के साथ बनाई गई शानदार व जटिल मूर्तिकला भी इसमें शामिल हैं।

थ्री डी प्रिंटिंग के प्रकार
थ्री डी प्रिंटिंग तकनीक के तहत चीजों को बनाने की प्रक्रिया को एडिटिव टेक्नोलॉजी कहते हैं। इसके तहत धातु को सख्त करने के लिए यूवी लाइट का प्रयोग किया जाता है। इसके विभिन्न प्रकारों को प्रयोग में लिया जाता है।

सेलेक्टिव लेजर सिनटरिंग : यह प्रक्रिया नायलॉन पाउडर को एक टिकाऊ ठोस प्लास्टिक में पिघला देती है। हालांकि यह दिखने में सुंदर नहीं होता लेकिन कार्यात्मक है। इसे हिंजिस और स्नैप फिट के साथ प्रोटोटाइप डिजाइन करने के लिए प्रयोग में लिया जाता है।

पॉलीजेट : यह कई रंगों और सामग्रियों के साथ वस्तुओं को थ्री डी प्रिंट करता है। लचीलापन इस प्रक्रिया को महंगा बनाता है। लेकिन यह सरल प्लास्टिक डिजाइन के लिए सही नहीं है।

डिजिटल लाइट प्रोसेसिंग : यह यूवी लेजर के बजाय एक हल्के प्रोजेक्टर का प्रयोग करता है। यह किसी वस्तु की पूरी परत को एक बार में बना देता है जिससे निर्माण गति बढ़ती है।

मेडिकल के क्षेत्र में हो रहा प्रयोग
मेडिकल के क्षेत्र में आजकल कोई भी समस्या का समाधान आसानी से मिल जाता है। मानव के टिश्यू के निर्माण के लिए चिकित्सा क्षेत्र में थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है। मुख्य रूप से चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े स्टेल सेल अनुसंधान के अलावा जीन एडिटिंग से लेकर कई अन्य संस्थान इस नई तकनीक का प्रयोग करते हैं।

प्रयोग के तरीके
किसी भी वस्तु को बनाने में धातुओं को प्रयोग में लिया जाता है। डायरेक्ट मेटल लेजर सिनटरिंग मैथड को चिकित्सा अनुप्रयोगों में हल्के डिजाइन के लिए प्रयोग किया जाता है। इलेक्ट्रॉन बीम मेल्टिंग धातु के पाउडर को सुपरहीट करता है।

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