मार्शल आर्ट की ३००० साल पुरानी विधा सिलंबम
से बनी ऐश्वर्या मणिवन्नन की पहचान…

मेरी पहचान ‘सिलंबमÓ से है, हालांकि मैं एक डिजाइनर व एजुकेटर भी हूं। लोग मुझे साड़ी पहन कर सिलंबम करने वाली चेन्नई की लड़की के तौर पर जानते हैं। मार्शल आर्ट की इस ३००० साल पुरानी विधा में मुझे नेशनल और एशियन गोल्ड मैडल मिले हैं। मैं इसके अभ्यास को अपना दैनिक ध्यान मानती हूं।

ऐसे बढ़ा कला में झुकाव
मैं भरतनाट्यम सीखती थी। मेरे गुरु ने बताया कि कैसे पारंपरिक मार्शल आर्ट से नृत्य मुद्राओं को साधने में मदद मिलती है। सिलंबम तमिलनाडु की हथियार आधारित भारतीय मार्शल आर्ट है। सिलंबम नाम तमिल शब्द ÓसिलमÓ (पहाड़) व “पेराम्बुÓ (बांस) से मिलकर बना है।

मैं सिलंबम को सिर्फ एक मार्शल आर्ट या आत्मरक्षा की कला नहीं मानती, मुझे इसमें गरिमा, शांति और सुंदरता दिखाई पड़ती है। मेरा मानना है कि अधिक से अधिक लड़कियों को इस विधा का अभ्यास करना चाहिए ताकि उनका सर्वश्रेष्ठ बाहर निकल कर आ सके।

साड़ी में सिलंबम
साड़ी में सिलंबम करते हुए मेरा एक वीडियो वायरल हुआ। लोगों ने कहा, मेरी मुद्राओं में सौम्यता व आंखों मेें आग है। शुरुआत में यह युद्धक कला पुरुषों के लिए मानी जाती थी क्योंकि इसमें लय के साथ बहुत दम चाहिए होता है।

लक्ष्य की तरफ ध्यान
लक्ष्य कोई भी हो, दिमाग व शरीर को एकाग्र रखे बिना लगातार आगे नहीं बढ़ सकते। यही सिलंबम की खूबी है। मुझे गर्व है कि मैं कुछ ऐसा कर रही हूं, जो विरासत को आगे बढ़ाने के अलावा मुझे पहचान भी दे रहा है।

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