mang me sindoor bhrne ke fayde

श्रृंगार ही औरत का गहना है। कुछ महिलाएं आधुनिक युग में और विज्ञान में बहुत विश्वास करती है। और करना भी चाहिए, क्योंकि उन्होंने जो कुछ भी सुना है वह शास्त्र हैं। और जो भी वो वर्तमान में देख रही हैं, वह विज्ञान है। लेकिन आपको बता दें कि हिन्दू धर्म में आज भी शादी शुदा स्त्री की पहचान उसके माथे पर लगे सिन्दूर से की जाती है। औरत के माथे में भरा हुआ सिन्दूर उसके पति की लम्बी आयु का भी प्रतीक माना जाता है। आधुनिक युग में इसे एक परंपरा का हिस्सा मानकर थोड़ा बदल दिया गया। माथे में भरी जाने वाली मांग को साइड में कर दिया गया। और देखा भी जाता है अक्सर पति भी उनके साइड में ही होते हैं। कुछ महिलाएं माथे में सिन्दूर तो लगाती हैं, लेकिन उसे बालों से ढक भी लेती है। ऐसे में माना जाता है कि पुरुष का पराक्रम भी छुप जाता है।

सिंदूर मांग में ही लगाना है सही

सुहागिन महिलाओं को सिंदूर हमेशा मांग में ही लगाना चाहिए। सिन्दूर के मांग बदलना भी गलत माना जाता है। मांग में सिंदूर लगा होने पर पति की अकाल मृत्यु नहीं होती। मांग के सिंदूर को बालों से छिपा लेने पर पति का सामर्थ्य भी छिप जाता है। मांग में न लगाकर यदि सिंदूर को किनारे लगाया जाता हैं, तो ऐसे में पति भी उस महिला से किनारा कर लेता है। मांग में भरा हुआ सिंदूर पति की लंबी आयु को दर्शाता है।

रामायण की इस कथा के जरिए समझे सिन्दूर का महत्त्व

मांग भरे जाने वाले सिन्दूर के महत्त्व को समझने के सबसे बेहतर उदहारण है रामायण का एक प्रसंग। इसमें बाली और सुग्रीव के बीच युद्ध के वक्त भगवान श्रीराम ने बाली पर धनुष नहीं उठाया। इस बात पर सुग्रीव नाराज भी हो गया था। सुग्रीव ने प्रभु श्रीराम से हाथ जोड़कर कारण जाना, तब श्रीराम प्रभु ने कहा कि तुम्हारी और बाली की शक्ल को देखकर में भ्रमित हो गया था। जरा सोचिए श्रीराम प्रभु कैसे धोखा खा सकते हैं, लेकिन इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है थी कि जब श्रीराम प्रभु ने बाली की पत्नी तारा की मांग में भरे हुए सिंदूर को देखा तो सिंदूर के सम्मान बालि वध के लिए धनुष नहीं उठाया। दूसरी बार जब सुग्रीव और बाली का युद्ध हुआ तब तारा स्नान कर रही थी। प्रभु के पास यह अच्छा मौका था और उन्होंने बाली को मार गिराया। मांग में सिंदूर भरा होने पर परमात्मा भी उसका सम्मान करते हैं।

Latest News