खुशखबरी, आपके बैंक अकाउंट में इतना पैसा डालने जा रही है मोदी सरकार!…

jan dhan

उमानाथ सिंह, नई दिल्ली। नोटबंदी के चलते  आम लोगों को परेशानी के बीच सरकार जल्द बड़ी वित्तीय राहत दे सकती है। नोटबंदी से सरकारी खाते में अब तक 2.5 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपए तक  रूपए आने की संभावना है। ऐसे में यह कयासबाजी बहुत  जोर पकड़ रही है कि इस बिग टिकट रिफॉर्म से सरकार खराब हुई अपनी छवि को चमकाने के लिए  आम लोगों के खातों में करीब 15 हजार रुपए  तक ट्रांसफर कर सकती है। सूत्रों के अनुसार  सरकार जनधन खातों में अब पैसे ट्रांसफर करने बतौर  गंभीरता से विचार कर रही है।  अगर ऐसा होता है तो कुल 25.4 करोड़ जनधन खाते में  से 80 फीसदी खाताधारकों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है। इससे  सरकार के राजनीतिक के साथ  आर्थिक मकसद भी पूरे होंगे। चुनाव के साथ ही फाइनेंशियल इन्क्लूजन प्रोग्राम भी सरकार के लिए बहुत ही अहम हैं। एचडीएफसी के चीफ अर्थशास्त्री  अभीक बरूआ के अनुसार  सरकार का मकसद लोगों को यह बताना हो सकता है कि कालेधन की कमाई सरकार  अपने पास नहीं, बल्कि आम लोगों को दे सकती  है।

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किन लोगों को होगा  लाभ

अधिक संभावना उन जीरो बैलेंस खाताधारक परिवार को  लाभ मिलने की है। देश में इस समय लगभग 25 करोड़ ऐसे परिवार हैं। सरकार तय करेगी कि सभी जनधन खातों को मिले  या फिर एक परिवार के सिर्फ एक ही खाते को। सिस्टम में अब लगभग 17 लाख करोड़ रुपए सर्कुलेशन में हैं। इनका 86 फीसदी हिस्सा  लगभग 14.5 लाख करोड़ रुपए 500 और 1000 रुपए के नोट हैं। इनमें से अब तक  8 लाख करोड़ रुपए नोटबंदी के बाद डिपोजिट के रूप में बैंक में जमा हो चुके हैं।  संभावना यह है कि 5 लाख करोड़ रुपए  बैंकिंग सिस्टम में वापस नहीं आए।  आरबीआई इन्हें डिविडेंड के रूप में सरकार को दे देगी। सरकार इन्हीं रुपयों का कुछ  हिस्सा खाता धारकों का देगी।

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क्या है कानूनी पेंच
बरूआ के अनुसार,  आरबीआई की ओर से जारी हर एक एक  रुपए के प्रति उसकी लायबिलिटी बनती है। ऐसे में आरबीआई अपनी लायबिलिटी में कमी को डिविडेंट या प्रॉफिट बताकर सरकार को ट्रांसफर करने में थोड़े कुछ  कानूनी पेंच आ आ सकते है। आरबीआई के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने इसके प्रति चेताया भी है।  चुनौती देने वाले कुछ पीआईएल भी दायर होने की  खबर है। अगर  पी चिदंबरम जैसे लोग पीआईएल दायर करें तो सरकार के लिए मामला आसान नहीं होगा । लेकिन सरकार ने इसे डिमॉनेटाइजेशन नहीं बताकर डिलीगेलाइजेशन नाम दिया है। बाकी मनी ट्रांसफर को सरकार सब्सिडी बता सकती है। इस मामले में तो शायद  कोई परेशानी नहीं आएगी।

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