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देश के इस जांबाज  ने भारत माँ की सेवा के लिए मौत को भी लौटाया खाली हाथ !

एक सेना का जवान जब भारत माँ की रक्षा के लिए प्रण लेता है की जबतक शरीर में प्राण रहेंगे तब तक दुश्मनो से लड़ता रहूँगा और अपने देश की रक्षा के लिए प्राण   न्योछावर भी कर दूंगा।  लेकिन इस जांबाज ने तो हद  ही कर दी।  देश की रक्षा के लिए जीने के जिद के आगे यमराज को भी खाली हाथ ही लौटना पड़ा।  जहाँ सेना में युद्ध कौशल में दुश्मनो से लड़ने के लिए सभी प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाता है शास्त्रों के अनुसार युद्ध कौशल और अपनी भक्ति के दम पर विद्या प्राप्ति के लिए योगी अपना जीव सुरक्षित रखने और साधना में लीन  होने के लिए  मस्तिष्क में चढ़ा लिया करते थे।
और यही आज चिकित्स्को  का कहना है की ऐसे चमत्कार ही कह सकते है क्योकि अमूमन व्यक्ति की मौत 2 से 3 घंटे के अंदर दम घुटने से हो जाती है।
छः  दिन तक जिन्दा रह पाना एक चमत्कार है या जो शास्त्रों  में लिखा था वो आज हकीकत होते देख रहा हूँ
 हमारा  जांबाज 25 फिट मोटी बर्फ की परत के निचे 6 दिन तक जिन्दा रहा। फ़िलहाल कोमा में है जहाँ किडनी और लिवर काम नहीं कर पा रहे।
भारतीय सेना में महानिदेशक (चिकित्सा सेवा ) रह चुके वेद चतुर्वेदी ने भी कहा की ऐसी स्थिति में बच पाना नामुमकिन होता है। ले. जनरल वेद चतुर्वेदी मानते है की इसका जवाब विज्ञानं के पास नहीं है।  वहीँ कार्डियोलॉजिस्ट विजय ने बोला की ऐसी परिस्थिति में बच पाना एक चमत्कार है या शास्त्र में जो योगीयों द्वारा किया जाता था।  विजय का कहना है की ऐसा पहली बार देखा है जहाँ 2 से 3 घंटे में हो जाने वाली मौत को भी जवान ने मात दे डाली।
आज का दिन अहम है और चिकित्सको  का कहना है की देशभर में दुआएं चल रही है और हरसंभव कोशिश जारी है।
वहीँ  राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री  और रक्षा मंत्री,सेना अध्यक्ष , अमिताभ बच्चन सहित देश के सभी देशवासी उनके अच्छे स्वस्थ्य की कामना कर रहे है।

ऐसा होता है प्रशिक्षण :- सेना का एक जवान अपने दायित्व निर्वहन कार्यकाल में शारीरिक  तौर पर सक्षम रहना  चाहिए।
शारीरिक क्षमता बढ़ाने और बरकरार रखने के लिए रोजाना दौड़ और परेड अनिवार्य होती है चाहे देश के किसी भी हिस्से में जवान की तैनाती हो।
पुरे कार्यकाल के दौरान सेना नहीं चाहती की सैनिक युद्ध कौशल में किसी भी घात को काट पाने में नाकाम हो। इसके लिए सभी देशो के प्रत्येक पैंतरों से
वाक़िब करवाने के लिए सयुंक्त युद्धाभ्यास भी समय – समय पर करवाये जाते है।
किसी भी क्षण पल भर में अपनी क्षमताओं का परिचय देते हुए विरोधियों को धूूल चटाने के लिए जवान शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार रहते है।
सेना के जवानों के प्रशिक्षण को आम लोग अगर देखते है तो नाम देते है की नरक की प्रताड़ना  के सामान है
 प्रशिक्षण ऐसी परिस्थितियों में करवाया जाता है जहाँ जिन्दा भी रहना होता है और दुश्मन को मारना भी होता है।
जहाँ सेनाओं को तीन भागों में बांटा गया है जल,थल और  नभ मगर यह सिर्फ विभाग तक ही सिमित है क्योकि जवानो को प्रशिक्षण इनके अतिरिक्त अग्नि और जमीं के भी मौके पर स्वयं सुरंग बनाते चलने का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। आम लोगों के द्वारा नरक की प्रताड़ना के समान  समझा जाने वाला यह सैनिक के लिए प्रशिक्षण  मात्र  है जो डेली रूटीन का हिस्सा होता है।
जहाँ तोपों की गर्जना मात्र से गर्भवती महिलाओ का गर्भपात हो जाता है वहीँ हमारी सेना के जवान उन तोपों से युद्ध के दौरान दिवाली मनाते है।


पारिवारिक स्थिति  :- 
सेना में जवान अपने परिवार से दूर रहता है मगर दूरिया दिलों की नहीं होती।  वो अपने परिवार को और रिश्तों को बखूबी निभाते है। इतना ही नहीं एक सैनिक के छुट्टी जाने पर दूसरे सैनिक के लिए उसके घर जाकर सभी जरूरतें पूरी करना भी एक जिम्मेदारी होती है।  कार्यकाल के दौरान दोस्ती इतनी होती है सब एक ही माँ के बेटे होते है। छुट्टी जाने वाला कोई भी सैनिक सब साथियों के लिए भी खुद के बराबर खाने की सामग्री लेके आएगा।  और साथी के घर किसी भी परेशानी को  छुट्टी के दौरान हल करके आएगा। घर से ड्यूटी पर जाते वक्त माँ की आँखों में आंसू होते है लेकिन वह अपने बेटे के सामने जाहिर नहीं करती क्योकि माँ को लगता है की मेरा बेटा कहीं परिवार की याद में अपना कर्त्तव्य नहीं भूल जाये।  कही दुश्मन के सामने लड़ते वक्त माँ के रोने की तश्वीर नहीं आ जाये। 
सेना के पास मुश्किल परिस्थितियों में सिर्फ एक फ़ोन बूथ होता जो उनके साथ रहता है जिसे वो एक बार दिन में चला सकते है जो परिवार या किसी अपने काम  जरुरी बात कर सकते है।  इसके लिए भी समय की सीमा होती है जो 2 से 3 मिनट होती है जिसके लिए जवानों की लाइन लगी होती है।

सैनिक बनने का जज्बा :- जहाँ किसी देश में सेना में भर्ती के लिए कानून बनता है और प्रलोभन दिया जाता है वहीँ अपने भारत देश में उसके विपरीत है।
अपने यहाँ सेना में जवानो की भर्ती प्रक्रिया की जानकारी सुनने मात्र से ही नौजवान दौड़ भाग और सभी प्रकार से शारीरिक क्षमता का परिक्षण देते है और वो अपने देश के प्रति सेवा के लिए जज्बे को साबित करते है , सेना में शामिल होने के लिए नौजवान पूरी रात मैदान के बाहर लाइन लगाकर अपनी बारी  का इंतजार करते रहते है।  जहाँ सेना को 100 सेनिको की भर्ती करनी होती है वहीँ शामिल होने के लिए लाखों नौजवान प्रक्रियां में शामिल होते है।
सेना की प्रत्येक प्रतिक्रिया और कार्यप्रणाली से वाक़िब होने के बाद बी नौजवानो को  देश भक्ति का जज्बा देश की रक्षा की ओर खींचता है।

सेना के लिए अहम :- सेना में भर्ती के साथ ही सैनिक अनुशासन और कर्त्तव्य के प्रति वफ़ादारी का हमेशा परिचय देता रहेगा।  सेना में कोई भी अधिकारी स्वयं को उसी लहजे में पेश नहीं करता मगर सबको एकजुटता का पाठ पढ़ाकर सभी के प्रति अपनी-अपनी जिम्मेदारी का अहसास भी करवाता है। 
सेना में कोई भी किसी भी पद पर कार्यरत क्यों न हो लेकि अपने को एक जवान के रूप में ही पेश करेगा। युद्ध या किसी भी प्रकार के ऑपरेशन में भी अधिकारी और सैनिक की भूमिका एक ही होती है।  सैनिक अनुशासन और कर्तव्य के प्रति वफ़ादारी ही नहीं निभाता उसके कंधे पर अपने साथियों की सलामती के साथ ऑपरेशन  में विरोधियों को समाप्त करने की जिम्मेदारी भी होती है। 
सेना का एक जवान गोरिल्ला नीति , कुत्ते के माफिक कान और कोवे की जैसे नजर और टाइगर जैसी घात आदि लगाने  महारथी होते है।  24 घंटे किसी भी पल अपने को एक योद्धा के रूप में पेश करते है।

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