सिर्फ 26 हजार रूपए महीना में नौकरी कर रहा है भारतीय सैनिक, मोदी भक्त जरूर पढ़ें 

भारत सरकार द्वारा सातवां वेतन लागू कर दिया गया और लगभग सभी लोगों का पता है की तनख्वाह बढ़ी है क्योंकि उनके सभी परिचित केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी है।  लेकिन उन्हें यह पता नहीं की भारतीय सेना के लिए केंद्र सरकार द्वारा वेतन बढ़ोतरी होती, बल्कि डिफेन्स के लिए अलग से आयोग है।   भारतीय सेना के एक जवान की मासिक तनख्वाह महज 24 हजार से 27 हजार रूपए है।  13 वर्ष से ऊपर नौकरी कर रहा सेना का हवलदार जब अपनी मासिक तनख्वाह देखता है उसके खाते में 20 हजार रूपए आते हैं जिससे वह सिर्फ एक बच्चे का दाखिला करवा पाता है। उसकी मासिक कटिंग 10 हजार रूपए हो सकती है मगर 30 हजार रूपए मासिक तनख्वाह की अगर राजस्थान पुलिस से भी तुलना करें तो सोच में पड़ जाओगे।  पुलिस या समकक्ष राज्य कर्मचारी की तनख्वाह 33 हजार 800 रूपए मासिक है जो शुरूआत में मिलने लगती है।  10 साल की नौकरी पर यह वेतन 45 हजार रूपए से 55 हजार रूपए तक हो सकता है।  
सेना के जवान को खुश दिखाया जाता है। 
देश में अंध भक्तों की कमी नहीं है।  सेना का जवान इसलिए खुश है की उसे स्वतंत्रता मिल गई की वो दुश्मन का सामना करने के लिए कितनी भी गोली चला सकता है।  आखिर केंद्र सरकार ऐसा मसला ही क्यों पाल रखी है।  आतंकियों के लिए रमजान और सेना के जवान को त्योंहार पर छुट्टी नहीं।  अपनी बेटी के जन्म पर एक दिन की छुट्टी नहीं मिलती।   अगर कोई सेना का जवान आपको मासिक वेतन के तौर पर 50 हजार रूपए बताता है तो उसका गणित यूँ समझिए :- 27 हजार रूपए तो मासिक वेतन रहेगा, लेकिन शेष बचा हुआ वेतन उसे नौकरी की जगह के अनुरूप मिलेगा।  जितना ज्यादा खतरा होगा, उतना ही allowance मिलेगा।    जबलपुर जैसी जगह पर 20 हजार रूपए अतिरिक्त मिलते हैं क्योंकि वहां आतंकी हमलों से ज्यादा तेंदुए और जंगली जानवर भी है।  राष्ट्रिय राइफल में 10 हजार से ऊपर अतिरिक्त allowance मिलता है क्योंकि वो सेना के जवान द्वारा खतरों वाली जगहों में से एक है।  
सेना के पास एकमात्र विकल्प 
सेना मोदी सरकार के पक्ष में नहीं है।  गोली मारने की आजादी का मतलब यह भी तो है की आए दिन हमारे सेना के जवान भी शहीद हो रहे हैं।  कांग्रेस सरकार में इतनी घटनाये नहीं हुई।  कश्मीर बिलकुल शांत था। जम्मू कश्मीर की लड़ाई सेना के स्तर की नहीं है। दोनों देशों की सरकार को जो काम करना चाहिए था वो सेना के कन्धों पर डाल दिया गया। सेना मोदी के अलावा किसे चुनें कोई विकल्प नहीं।  कांग्रेस में कोई काबिल नेता भी नहीं है।  मोदी को चुनना एक मज़बूरी है।  सेना के जवान को सुविधा के तौर पर उसे  सबसे पहले वेतन से तो संतुष्ट करो।  सेना के अधिकारीयों का वेतन सुनने पर होश उड़ जाते हैं।  एकबार अपने परिचित किसी सेना के जवान से हकीकत जानने की कोशिश जरूर करें। सेना के जवान के वेतन से अपने राज्य के छोटे से कर्मचारी के वेतन तुलना भी करें। 
मात्र 24 हजार रूपए महीने का वेतन सिर्फ भारतीय सेना ही झेल सकती है।  क्योंकि वो कभी हड़ताल नहीं करती, उसमें यूनियन होते हुए भी वो खिलाफत नहीं कर सकती।  अपना काम ईमानदारी से करती है। इसी कारण अध्यापकों और डॉक्टरों की तनख्वाह पर सरकार तुरंत एक्शन ले लेती है।  सेना अनुशासन में रहती है 
सभी एकबार सरकार से अपील जरूर करें और सेना के जवान को इतना वेतन दिलाएं की वो अपना घर परिवार चलाने के साथ सेवानिवृति पश्चात बच्चों की शादी और उनके लिए  एक घर बना सके। 
घर नहीं खरीद पाया एक जवान 
वाकया जयपुर का है।  एक जयपुर विकास प्राधिकरण का 100 वर्ग गज का घर जिसकी कीमत 35 लाख रूपए थी।  घर बना हुआ था।  घर खरीदने के लिए उसके पास बचत के तौर पर 2 लाख रूपए थे। जब बात हुई और अग्रीमेंट हुआ तो लोन के लिए बैंक गया। बैंक ने जरुरी दस्तावेज में तीन महीने की सैलरी स्लिप मांगी तो जवान ने सभी दस्तावेज दे दिए।   बैंक ने 24 हजार से 27 हजार वाली सैलरी स्लिप देख सिर्फ 13 लाख रूपए पास करने की बात कही।  जवान को चाहिए थे 32 लाख रूपए। बात वहीँ ख़त्म हो गई क्योंकि उसकी तनख्वाह में वो घर नहीं आ सकता। अगर लोन ले भी लिया तो शेष रकम कहाँ से एकत्र करेगा और उनको चुकाएगा कैसे। सैलरी 24 से 27 इसलिए बताई गई है क्योंकि सेना के जवान की तनख्वाह कभी समान नहीं आती। हर महीने कम और ज्यादा होती रहती है। 

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