कोरोना काल से पहले की बात करें तो बीच में किसान आंदोलन के कारण आमजन को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कॅरियर की बात करें तो एग्रीकल्चर एक ऐसा विषय है जिसे करने के बाद कैंडिडेट बेहद आसानी से अपना जीवनयापन कर सकता है। इन दिनों किसानों की बढ़ती हुई समस्या को देखते हुए कृषि यानी एग्रीकल्चर के कानूनी विशेषज्ञों की मांग में भी काफी इजाफा हुआ है। ऐसे लोग जो कानून विषय में दिलचस्पी रखने के साथ ही खेती का काम भी संभालना चाहते हैं, वे कृषि कानून विशेषज्ञ बन सकते हैं। कृषि कानून विधेयक पास होने के बाद इन विशेषज्ञों की मांग में काफी इजाफा हुआ है। भारत में कई इस मुद्दे है जो खेती और इसकी समस्याओं से संबंधित हैं।

ये होती हैं जिम्मेदारियां
किसान कानून विशेषज्ञ उद्देश्य भावी पीढिय़ों के लिए खेतों को संरक्षित करने में मदद करने के लिए उत्तराधिकार योजना में किसानों की सहायता करना है।
जोनिंग यानी भूमि उपयोग के मामलों और प्रख्यात डोमेन मुद्दों में सहायता करना।
कृषि संस्थाओं को संचालित करने के लिए कॉर्पोरेशंस, प्रोपराइटरशिप और पार्टनरशिप स्थापित करने के लिए लाइसेंस और परमिट प्राप्त करना।
कृषि उद्योग से जुड़े लोगों के लिए श्रम और रोजगार कानूनों के बारे में जानकारी का स्रोत बनना।
उत्पादों की पैकेजिंग और लेबलिंग में धोखाधड़ी और धोखे को रोकने में सहायता करते हैं।
खेती से जुड़े व्यक्तियों, कंपनियों या संगठनों को सामान्य कानूनी सलाह देना।

फीसदी मामले देशभर में केवल कृषि और इससे जुड़े मामले के सामने आते हैं।
से ५० हजार रुपए बतौर कृषि कानून विशेषज्ञ के रूप में शुरुआती समय में कमा सकते हैं।
वर्षीय बैचलर्स डिग्री करने के बाद और या फिर १२वीं के बाद एग्रीकल्चर या इससे जुड़े क्षेत्र में लॉ डिग्री प्राप्त कर सकते हैं।

अनिवार्य योग्यता,नौकरी
कृ षि वकील के रूप में यदि कॅरियर शुरू करना चाहते हैं तो लॉ स्कूल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। कानून या राजनीति विज्ञान में डिग्री या बैचलर्स डिग्री के अलावा एलएसएटी परीक्षा में अच्छा स्कोर प्राप्त किया हो। ऐसे प्रोफेशनल कई जगह व पद पर काम कर सकते हैं।
लीगल एडवाइजर
स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी आदि में शिक्षक
एन्वरन्मेंटल लॉयर
फूड एंड ड्रग लॉयर
एग्रीकल्चर लॉयर
सोशल इश्यू एक्टिविस्ट
लेबर लॉयर

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