Rajasthan Election opinion Poll 2018,
Rajasthan Election opinion Poll 2018,

Ajmer Vidhansabha Election 2018
प्रदेश के लिए यह समय चुनाव चरम तक पहुंच चुके हैं। जिन मुद्दों पर बात होनी चाहिए, वो तो हो नहीं रही, फिजूल की बातें बहुत सारी हैं। एक तरफ तो स्कूल के मास्टरों को चुनावी ड्यूटी में लगा दिया है, दूसरी ओर विश्व की सुप्रसिद्ध दरगाह की बात करें तो उसका मास्टर प्लान ही नहीं है। अगर एेसा ही रहा तो बच्चों का तो ज्ञान अधूरा रहेगा ही, जायरीन दरगाह में आकर अगर परेशान ही रहेगा तो वो मन्नत मांगने मंं मन ही नहीं लगा पाएगा। मसलन न तो ज्ञान ही मिला और न ही ख्वाजा का नूर…चलिए आपको अलग-अलग बताते हैं कि असल में समस्याएं कहां है और क्या है…

Ajmer Election 2018 ख्वाजा साहब से मन्नत मांगने वालों का सैलाब यहां रोजाना उमड़ता है। दुनियाभर के जायरीन आते हैं। दस साल पहले के बम धमाके के बाद यहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के बारे में सुना था। सोशल वर्कर रियाज अहमद मंसूरी ने बताया कि दरगाह अजमेर स्मार्ट सिटी परियोजना का हिस्सा ही नहीं है जबकि दरगाह के कारण ही अजमेर स्मार्ट सिटी में शामिल हुआ। अजमेर के टिकट पर एक रुपया दरगाह टैक्स के नाम कटता है पर यहां के हालात देखकर तो नहीं लगता कि वह इस पर खर्च किया जाता होगा। स्वाभाविक है जब हजारों की संख्या में रोजाना लोग आते हैं तो पर्यटन से आय यहां के लोगों का मुख्य जरिया है, लेकिन उसकी चमक भी यहां दिखाई नहीं देती।

Rajasthan Election opinion Poll 2018

आधे से ज्यादा शिक्षकों की चुनाव में ड्यूटी लगने से राज्यभर के स्कूलों व कॉलेजों में पढ़ाई चौपट हो गई है। हर जिले के कुछ कालेज परिसरों का अधिग्रहण करने से वहां भी छुट्टी का माहौल है। स्कूलों में बच्चों की अद्र्धवार्षिक परीक्षा दिसम्बर के दूसरे सप्ताह में होनी है, लेकिन उनका चालीस फीसदी कोर्स अभी भी अधूरा पड़ा है। हालांकि अजमेर समेत कुछ जिलों की स्कूलें ऐसी भी हैं, जहां कोर्स पूरा हुआ है, पर वहां भी अभी पढ़ाई ठप ही है। कॉलेजों में भी दिसम्बर मध्य में परीक्षा होनी है। चुनाव के बाद मतगणना में भी बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जानी है। ऐसे में नहीं लगता है कि इस बार अद्र्धवार्षिक परीक्षा तक स्कूलों में कोर्स पूरा हो सके। इसका असर आगे वार्षिक परीक्षा तक पडऩे की आशंका है।

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