पुलवामा आतंकी हमला
पुलवामा आतंकी हमला

देश में आतंकी पनपने के पीछे हाथ भी नेताओं का ही होता है, चाहे उन्हें अलगाववादी कहें या आतंकी संगठन कहें। देश की सुरक्षा जिस भी सेना के हवाले की जाती है उसे पूरी छूट होनी चाहिए। सुरक्षा में सेंध सिर्फ नेताओं की बदौलत आतंकी मारते हैं। पाकिस्तान से विस्फोटक आया कैसे, गाड़ियों के लिए रास्ता किसने खुलवाया। इन सब बातों को लेकर जांच होगी तो किसी बड़े नेता का नाम सामने आएगा लेकिन उसे जनता में पेश नहीं किया जाएगा। क्योंकि उसके पास भी सदन में कुछ सीटें है। सबसे बड़ी विडंबना तो ये है की पाकिस्तान जैसे देश बाड़बंदी कर रहें है वो भी अफगानिस्तान से सुरक्षा के लिए। प्रधानमंत्री जी जितना पैसा आप लुटा रहे हो उतने में तो पाकिस्तान और भारत के बीच स्टील की दीवार बन जाती। प्रधानमंत्री बनाया था देश की सुरक्षा के लिए। आपकी चौकीदारी पर हमें संदेह होने लगा है। आप राजनीती में सुदबुद खो बैठे हैं। आप जाग जाइये और उन सभी आतंकी संगठनों को चुन चुन कर ख़त्म करिए जो देश में जगह बनाये हुए है।

पुलवामा आतंकी हमला

मानवाधिकार
कुछ गोलिया सेना उन्हें भी परोसे जो आतंकी के मानवाधिकार की पैरवी करते हैं। क्यों आज वो सामने नहीं आ रहे जब जवान चीथड़ों में बिखर गए। लेकिन आतंकी के फांसी पर चढ़ने से पहले वो अदालत का दरवाजा तक खटखटा लेते हैं। कुछ मीडिया के लोग भी आतंकी नेताओं के घर काजू बादाम खाने के लिए इंटरव्यू के नाम से जाते हैं।

सबसे पहले जम्मू कश्मीर के संगठन नेताओं को मारो गोली
कश्मीर में जितने भी संगठन हैं उनके नेताओं को चुन चुनकर मारना चाहिए जो बच्चों को इस विकल्प को चुनने पर मजबूर कर रहे हैं। मुश्किल से 10 नेता हैं जिन्हे ख़त्म करने मात्र से ही कश्मीर शांत हो जाएगा। लेकिन केंद्र सरकार उन्हें खर्चा देती है और होटल में रुकने की व्यवस्था करती है। उन्हें करोड़ों रूपए खर्च के साथ अच्छी सुरक्षा देती है। लानत है सरकार पर जिसने बड़ी – बड़ी बात की थी और अब सिर्फ जांच कर रही है।

Pulwama Aatanki Hamla

सेना के हवाले क्यों नहीं करते
कश्मीर जब आतंकियों का गढ़ है तो उसे सिर्फ सेना के हवाले करो, पुलिस को मरवाने के लिए ही वहां क्यों भेजा गया। पुलिस से ही काम करवाना है तो सेना का जैसा प्रशिक्षण और हथियार मुहैया करवाओ। सेना को सभी परिस्थितयों से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है तो फिर पुलिस को क्यों बीच में लाया जाता है। हिन्दुस्तान के पास इतनी बड़ी फ़ौज है की कश्मीर में हर एक घर के बाहर हाथ से हाथ मिलाकर खड़ी हो सकती है। आतंकी तो क्या, उन्हें पनाह देने वालों की टट्टी तक बंद कर देगी।

आतंक की राह आसान
जब कश्मीर में सब्सिडी के गेहूं और चावल के साथ सभी सुविधाएँ फ्री मिल रही है तो आतंकी ही बनेंगे। सरकार उन्हें कमाने के लिए प्रेरित नहीं कर रही। जिस बन्दे को फ्री में खाना और खर्चा मिलता रहेगा तो वो लड़ाई ही करेगा ना। सेना के एक हफ्ते का काम है कश्मीर से आतंक का सफाया करना। लेकिन नेता फिर किस एजेंडे पर चुनाव लड़ेंगे। कश्मीर और राम मंदिर ही तो मुद्दे बचे हैं। देश का प्रधानमंत्री बहुमत के साथ आया है और पूरी दुनिया उसके समर्थन में है तो कुछ तूफानी करनी चाहिए। नरेंद्र मोदी को वैसे भी तूफानी करने का शोक है ऐसे में नोटबंदी और जीएसटी के बाद एक तूफानी तो बनती है बॉस।

अजीत डोभाल
हाल ही प्रधानमंत्री ने मीटिंग में अजीत डोभाल से भी वार्ता की है। अजीत डोभाल एक ऐसा नाम है जो पाकिस्तान के लिए उसकी दुखती हुई रग है। डोभाल के पास पाकिस्तान में हिलने वाले पत्ते की भी जानकरी होती है। इस घटना का भी अलर्ट महीने पहले आ गया था। अजीत डोभाल के पास सभी पैंतरे है और सोलुशन भी, लेकिन सरकार भी तो उन्हें स्वतंत्र छोड़े। सेना को अजीत डोभाल की कप्तानी में कश्मीर में उतारा जाता है तो एक हफ्ता भी नहीं लगेगा आतंकी से मुक्त होने में।

दोगला बॉलीवुड
फिल्म बनाने के लिए सारे निर्माता तैयार रहते हैं लेकिन दुःख व्यक्त करने का भी समय नहीं है। क्योंकि पाकिस्तान से इन्हे सम्मान और मैडल मिलता है। देश का खाने वाले भड़वे अपना रूप इसी वक्त दिखाते हैं। फिल्म बनाकर करोडो कमा लेंगे लेकिन एक ट्वीट नहीं करेंगे।

दुनिया का सहयोग
भारत को सभी ताकतवर देशों के साथ सभी देशों का सहयोग मिल रहा है। आतंक से त्रस्त दुनिया एक जुट होकर कार्यवाही के मूड में है। देखा जाए तो पाकिस्तान पर कार्यवाही के लिए सिर्फ हुन्दुस्तान को तैयार होना है बाकि सभी देश अपना बेस्ट देंगे। भारत का साथ प्रत्येक देश देना चाहेगा। मोदी की दुनिया इस वक्त फैन है और उसका बेनिफिट लेने का बेहतरीन मौका है। अमेरिका, रूस, फ़्रांस जैसे देश साथ है तो फिर कार्यवाही में किस बात का सोचना। अकेला हिन्दुस्तान ही काफी है लेकिन राजनीती बीच में नहीं आये तो

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