rajasthan election 2018
rajasthan election 2018

Rajasthan Vidhansabha Election 2018 को लेकर दोनों ही पार्टियां घोषणाओं का अम्बार तो लगा रही है लेकिन इन घोषणाओं में क्या वाकई दम है। राज्य में किसान कर्ज माफ़ी नजरअंदाज, स्टार्टअप फण्ड की गणित में उलझा किसान। 5 वर्षों में 1 लाख करोड़ रूपए के सहकारी ऋण दिए जाएंगे। 5 वर्ष में 50 लाख रोजगार के अवसर सृजत करने की घोषणा। किसान की आय बढ़ाने के लिए फसलों की लागत के डेढ़ गुना भाव पर होगी खरीद प्रक्रिया। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए 250 करोड़ रूपए का ग्रामीण स्टार्ट-अप फण्ड स्थापित करने की योजना।

भाजपा घोषणा पत्र ‘गौरव संकल्प 2018’ में युवाओं को क्या मिला!

शिक्षित बेरोजगारों को 5 हजार अधितम भत्ते की घोषणा तो की गई मगर कितने वर्ष तक के लिए (घोषणा पत्र में नहीं )
सरकारी क्षेत्र में प्रतिवर्ष 30 हजार नौकरियों के वादे तो किए लेकिन पिछले चुनाव में 15 लाख नौकरियों के वादों को नहीं किया याद।
नरेगा की तर्ज पर शहरी रोजगार गारण्टी कानून बनाने की घोषणा

Rajasthan Assembly Election को लेकर कर्मचारी वोट पर भी घोषणा पत्र के जरिए साधा निशाना
राज्य कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन वर्तमान में 17700 रूपए से बढाकर 18000 रूपए किए जाएंगे। 2400 से 2800 ग्रेड पे समाप्त कर, सातवें वेतन आयोग के अनुसार विभिन्न भत्ते संशोधित किए जाएंगे। राजकार्य में कर्मचारी की मर्त्यु उपरांत आश्रितों को 10 वर्ष तक पूर्ण पेंशन की की योजना। स्थानांतरण की पारदर्शी निति बनाई जाएगी।

2018 चुनावी घोषणा पत्र हिन्दू एजेंडा पर, इसबार मुस्लिम (अल्पसंख्यक) नजरअंदाज। 2013 के चुनाव में भाजपा ने अल्पसंख्यकों से किए थे 12 वादे . 2008 में भी संकल्प पत्र से गायब थे अल्पसंख्यक। पिछले घोषणा पत्र में परशुराम विश्वविद्यालय की घोषणा की गई जो अब तक नहीं हुई पूरी लेकिन फिर से इस बार परशुराम बोर्ड की घोषणा कर दी गई। खाद्य सुरक्षा आयोग फाइलों में ही बना। जातिगत समीकरण साधने के लिए 13 नए बोर्ड और आयोग बनाने का किया वादा। 11 साल में नहीं बना पाए सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंसी, अब राष्ट्रिय पर्यटन स्थल बनाने का वादा

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