shahpura jaipur election result
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Shahpura Election Result 2018 : शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र में 15 वर्षों तक विधायक रहे राव राजेंद्र सिंह इसबार चुनाव हार गए। जीत की शुरुआत के साथ ही लोगों के बीच अच्छी पहचान बनाई और साप्ताहिक रूटीन भ्रमण तक किया। जब दो बार जितने के बाद लोगों को लगा की अच्छे नेता है तो उन्हें तीसरी बार मौका दिया गया लेकिन विचारों में क्या बदलाव आया की आसन्न पर बैठने के बाद मंत्रियों तक से कार्य न करने पर माफ़ी मंगवा दी। यहाँ तक तो सब सही था लेकिन जनता के बीच न जाकर और जनता की नाराजगी के चलते खुद को कभी माफ़ी योग्य नहीं समझा। विधानसभा में बैठाने वाली यही जनता थी जिसने इसबार घर बिठा दिया।

शाहपुरा में भाजपा की हार के प्रमुख कारण

हार के कारण Reason Of Shahpura Election Loss for BJP
ऐसे कार्यकर्ताओं को तवज्जो देना जो धरातल के कार्यकर्ताओं से दुश्मनी निकाले
धरातल पर कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत संपर्क कभी नहीं किया और न ही करना चाहा
क्रेडिट लेने वाले कार्यकर्ताओं के बूते मैदान में उतरे
दल – बदलू कार्यकर्ताओं पर भरोसा, जिनका कोई वजूद नहीं (अभी भी ये न समझे की वो नहीं थे इसलिए हारे )
जनता तक सीधे संपर्क नहीं बना सके
विपक्षी वोट को जोड़ने के लिए खुद के वोट तोड़ लिए (ग़लतफ़हमी थी की ये तो हमारे ही रहेंगे, इनके पास मेरे आलावा क्या विकल्प है )
विरोधियों के कहने पर तबादले, सच्चे कार्यकर्ताओं की तबादलों में एक भी नहीं सुनी
राजकुमार देवायुष का जनता में बीच समस्या सुनने की बजाय अराजक तत्वों के साथ मिलनसार होना
देवायुष ने जिन लोगों से दोस्ती बनाई उनके अनुसार 20 गुना वोट कटौती हुई है।
राव राजेंद्र सिंह जी को जनता का फीडबैक नहीं मिला। फीडबैक देने वाले खुद देवायुष की बुराई नहीं कर सकते

मनीष की हार के कारण Manish Yadav Shahpura
मनीष ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। अगर आलोक के साथ कमला बेनीवाल और प्रवीण व्यास नहीं होते तो मनीष को बड़ी जीत मिलती। मनीष ने स्वर्ण समाज से किसी चेहरे को अपने साथ नहीं लिया। आलोक के लिए रणनीतिकार साबित हुई उनकी माताजी। किंग मेकर की भूमिका में प्रवीण व्यास ने निभाई जिम्मेदारी। 5 वर्ष तक भाजपा को घर से ही सभी रणनीतियां बनानी होगी। देवायुष हो या दुष्यंत सिंह ये सब प्रचार के योग्य नहीं है। ये सरकारी योजनाओं के उद्घाटन के योग्य भी नहीं है। दुष्यंत सिंह सांसद होने के नाते कर सकते हैं। जनता में देवायुष की छवि भी खटकने लगी थी। जनता ने विधायक खुद के लिए चुना है अगर जनता के लिए समय न मिले तो फिर विकल्प ही तलाशे जाते हैं।

Alok Beniwal Shahpura के जितने का बड़ा कारण सहानुभूति भी रहा है। लेकिन माँ कमला बेनीवाल की रणनीति और प्रविष व्यास की भूमिका ऐसे लग रही है मानों कमला जी और हनुमान व्यास की तरह लम्बी चलेगी। देखा जाए तो praveen Vyas Shahpura की प्रधानी पक्की है।

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