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Breaking News : विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज करने को लेकर सभी राज्यों में किसानों की कर्जमाफी एक बड़ा मुद्दा रहा। किसानों की कर्जमाफी से खुद राज्य कर्जे के बोझ तले दब गए। देखा जाए तो इस संकट से बचने के लिए सरकारें मुकर भी नहीं सकती थी क्योंकि आगे लोकसभा चुनाव भी थे। किसानों की कर्जमाफी का भुगतान करने के लिए राज्य के शराबियों के ऊपर डाल दिया गया। राज्य सरकारें अगर किसी भी जरुरी वास्तु या सेवा पर कर या दर बढ़ाती है तो विरोध का सामना करना पड़ सकता है। शराब के लिए विरोध के आसार न के बराबर है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट की मानें तो किसान कर्जमाफी की कीमत शराब कंपनियों को चुकानी पड़ सकती है क्योंकि कर्जमाफी की वजह से पड़ने वाले आर्थिक बोझ बराबर करने के लिए राज्य सरकारें शराब पर टैक्स बढ़ाने की सोच रही है।

जानिए कितना बढ़ सकता है शराब पर टैक्स
एडलविस सिक्यॉरिटीज लिमिटेड के अनुसार कृषि कर्जमाफी के बाद वित्तीय घाटे को भरने के लिए सरकारों को रेवेन्यू की बहुत ज्यादा जरूरत है और सरकारें इसके लिए किसी भी प्रकार से टैक्स बढ़ाने की कोशिश में हैं। टैक्स में वृद्धि का शराब की मांग पर असर पड़ेगा, क्योंकि कंपनियां अतिरिक्त पैसा ग्राहकों से वसूलेंगी। इसका मतलब होगा कि कृषि कर्जमाफी शराबियों पर भारी पड़ेगी।

विकल्प एकमात्र शराब
एडलविस सिक्यॉरिटीज के विश्लेषक अबनीश रॉय और आलोक शाह ने बताया की शराब से करीब 25 फीसदी राजस्व आता है और 1 जनवरी को एक इन्वेस्टर नोट में साफ़ लिखा था कि शराब पर टैक्स बढ़ानाही एकमात्र संभावित विकल्प है, क्योंकि राज्य सरकारें कर्ज लेकर अपना जीडीपी-कर्ज ख़राब नहीं करना चाहेंगी। उनके अनुसार पहले भी सरकारें ऐसा करती रही है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हुए चुनावों में कांग्रेस ने किसानों की कर्जमाफी का वादा किया और निभा भी दिया। कहा जा रहा है कि इसी वादे के चलते कांग्रेस ने सत्ता हासिल की है।

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