इन लक्षणों से पहचानें
वैसे तो रोग की पहचान के लिए उसकी जांच करवाना सही विकल्प है, फिर भी ब्रेस्ट कैंसर को कुछ खास लक्षणों से पहचाना जा सकता है। इन लक्षणोंं में ब्रेस्ट में गांठ होना, बांह के नीचे गांठ होना, निप्पल डिस्चार्ज जैसी स्थितियों में तुरंत योग्य चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

स्टेज पर निर्भर होता है इलाज
स्तन कैंसर का इलाज पुरुषों व महिलाओं में समान ही है। इसका इलाज स्टेज पर निर्भर करता है। इसमें सबसे पहले कैंसर की सर्जरी कर गांठ और लिम्फ नोड्स को निकालते है। इसके बाद कीमो व रेडिएशन थैरेपी दी जाती हैं, ताकि कैंसर सेल्स खत्म हो जाएं।

रेडिएशन थैरेपी से जुड़े मिथक
कैंसर के इलाज से जुड़े कुछ मिथक भी प्रचलित हैं। इनसे बचकर इसका इलाज लेना चाहिए।

रेडिएशन से त्वचा जल जाती है : पहले कोबाल्ट थैरेपी में रेडिएशन से त्वचा पर भी प्रभाव पड़ता था। अब एडवांस तकनीक ऐसा नहीं होता है।

दर्द भरा इलाज : रेडिएशन से बिल्कुल भी दर्द नहीं होता। यह थैरेपी, सीटी स्कैन और एक्स-रे के समान ही है। मरीज को मशीन में लिटाकर ट्रीटमेंट दिया जाता है।

बाल झड़ जाते हैं : ऐसा केवल ब्रेन ट्यूमर में रेडिएशन देने से होता है जबकि बच्चेदानी, छाती या स्तन कैंसर आदि के इलाज में ऐसा नहीं होता है।

शरीर में खराबी आ जाती : आइएमआरटी, आइजीआरटी, वी मेट, एसआरटी जैसी सही तकनीक से यह दिक्कत नहीं होती है।
कैंसर जड़ से नहीं मिटता: बच्चेदानी, वोकल कॉर्ड या लिम्फोमा संबंधी कैंसर को रेडिएशन जड़ से मिटाता है। स्तन व मुंह के कैंसर में सेल्स को दबाता है।

स्त न कैंसर केवल महिलाओं में ही नहीं, बल्कि पुरुषों में भी होता है। खराब व अनियमित जीवनशैली से पुरुषों में इसके मामले बढ़ रहे हैं।

पुरुषों में भी ब्रेस्ट टिश्यू : महिला व पुरुष, दोनों में ब्रेस्ट टिश्यू होते हैं जिनमें कैंसर विकसित होता है। 400 पुरुषों में से एक को यह होने की आशंका होती है। शुरुआती स्टेज में इलाज काफी आसान है।

प्रमुख कारण : आनुवांशिकता, खराब जीवनशैली, शराब, तंबाकू व गुटखा जैसी लतें भी इसका कारण बनती हैं। यदि परिवार में ब्रेस्ट कैंसर की हिस्ट्री रही हो तो भी यह कारण हो सकता है।

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