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Interesting Facts: प्रतियोगी परीक्षा में अक्सर कहीं से भी कुछ भी पूछा जा सकता है। बहुत से लोगों को पता नहीं कि ‘कुर्दिस्तान कहां है’ और CJI की नियुक्ति कौन करता है। ऐसे ही बहुत से सवालों की सीरीज हम लेकर आए हैं।

कुर्दिस्तान कहां है?

कुर्दिस्तान स्वतंत्र देश नहीं है, बल्कि एक इलाके का नाम है। दक्षिण पूर्व तुर्की, उत्तरी सीरिया, उत्तरी इराक और उत्तर पश्चिम ईरान से लगे क्षेत्रों में काफी बड़ी आबादी कुर्द समुदाय की है। इनमें सुन्नी और शिया दोनों तरह के मुसलमान शामिल हैं। इनके बीच यारासनी, यजीदी, जोरोस्ट्रियन और ईसाई समुदाय भी हैं। इनमें काफी लोग इस पूरे क्षेत्र को मिलाकर एक अलग कुर्दिस्तान बनाना चाहते हैं। तुर्की में रहने वाले कुर्द एक अरसे से अलग देश की लड़ाई लड़ रहे हैं। सीरिया से अमरीकी सेना के हट जाने के बाद कुर्दों का तुर्की से सीधे टकराव चल रहा है। इस्लामिक स्टेट के खिलाफ चली लड़ाई में कुर्दों के संगठन सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) ने अमरीका का साथ दिया था। उनके साथ सीरिया के कुर्दों का संगठन वाईपीजी भी था। अमरीकी सेना के हट जाने के बाद उनका सीधा टकराव तुर्की से है। तुर्की में कुर्दों का मुख्य संगठन कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी है, जिसका कुर्द भाषा में संक्षिप्त नाम पीकेके है। इस संगठन पर पाबंदी है।

भारत में चीफ जस्टिस की नियुक्ति कैसे होती है?

संविधान के अनुच्छेद 124 में सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति का प्रावधान है। इसमें मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के बारे में किसी विशेष प्रावधान का जिक्र नहीं है। अलबत्ता सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को नियुक्त करने की परंपरा बन गई है। निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश अपने बाद के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश के नाम की संस्तुति राष्ट्रपति से करते हैं। वरिष्ठता सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की तिथि से तय होती है। वरिष्ठता की परंपरा का दो बार उल्लंघन हुआ है। पहली बार 25 अप्रेल, 1973 में जस्टिस एएन रॉय को तीन न्यायाधीशों की वरिष्ठता की अनदेखी करके मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। दूसरी बार इमरजेंसी के दौरान 29 जनवरी, 1977 को जस्टिस एचआर खन्ना की वरिष्ठता की अनदेखी करके जस्टिस एमएच बेग को मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। इस समय देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना (नूतलपाटि वेंकटरमण) हैं, जो देश के 48वें मुख्य न्यायाधीश हैं। उनका कार्यकाल 26 अगस्त, 2022 तक है।

सोने की खोज कैसे हुई?

भारत में सिंधु घाटी की सभ्यता के अवशेषों में सोने-चांदी और तांबे के आभूषण मिले हैं। प्राचीन मिस्र में भी दोनों धातु मिलते हैं। दोनों धातुओं की खासियत है, इनका बेहद नरम होना। सोना इतना नरम होता है कि उसके एक ग्राम के टुकड़े से एक वर्ग मीटर की शीट बनाई जा सकती है।

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