Mind Body
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Mind Body: यूनानी चिकित्सा पद्धति में मिजाज (प्रकृति) बहुत मायने रखता है। इसमें व्यक्ति से लेकर रोग तक की प्रकृति पर ध्यान दिया जाता है। यूनानी में बताए छह सिद्धांत अपनाकर जीवनशैली व इम्युनिटी बेहतर की जा सकती हैं-

1. हवा-ए-मुहीत
(आसपास की आबोहवा) शुद्ध हवा व बेहतर पर्यावरण सबसे जरूरी है। अत: अपने आसपास शुद्ध हवा रहे और क्षेत्र प्रदूषण से मुक्त रहे। तभी बेहतर ऊर्जा मिल पाएगी।

2. माकूल-व-मशरूब
(खाने-पीने की चीजें) इस पद्धति में प्रकृति के अनुरूप खाने-पीने की चीजों को निर्धारित किया। यदि वह इसके अनुसार चलता है तो स्वस्थ रहता है।

3. हरकत व सुकून बदनी: (शारीरिक कार्य व आराम) जितना काम करे, उसी की तुलना में शरीर को आराम भी दिया जाना जरूरी है। शरीर की क्षमता के अनुसार काम व आराम मिले।

4. हरकत व सुकून नफसानी:
(मानसिक सक्रियता व आराम) इसके अनुसार भी आराम जरूरी है। मानसिक थकने पर थोड़ी देर के आराम जरूर करें।

5. नोम व यकजा: (सोना व जागना) शारीरिक व मानसिक रिकवरी के लिए सही
समय एवं सही मात्रा में नींद लेना अनिवार्य (6 से 8 घंटे) है।

6. एहतिबास व इस्तेफ्राग:
आवश्यक चीजें शरीर में रुकना व खराब चीजें बाहर निकलना जरूरी है। यदि इन दोनों में संतुलन रखकर व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है।

डाइट कंट्रोल भी जरूरी: ओवरईटिंग से बचें। उतना ही खाएं जितना पचा पाएं। पेट कभी भी इतना नहीं भरे कि थकान जैसा महसूस हो। खाने के बाद घूमना जरूरी है।

यूनानी से जुड़े कुछ खास नुस्खे
शहद के एंटी-बैक्टीरियल गुण खांसी से जल्द राहत दिलाते हैं। रात को सोने से पहले 1 चम्मच शहद लें। आधा चम्मच शहद में थोड़ी इलायची और नींबू का रस डालकर दिन में 3 बार लें।

अदरक के टुकड़े शहद के साथ मिलाकर चबाने से खांसी में तुरंत राहत मिलती है। अदरक का जूस निकालकर शहद की कुछ बूंदे मिलाकर लें।

दूध में हल्दी मिलाकर पीना वैसे भी फायदेमंद है और यह खांसी में भी कारगर है। हल्दी का एंटी-बैक्टीरियल (व एंटीवायरल) गुण आराम दिलाता है। दूध फीका ही लें। इसमें शहद व थोड़ी हल्दी मिला सकते हैं।
मुलेठी (थोड़ी-सी) चूसने से गले की खराश एवं खांसी में लाभ होता है। साथ ही फेफड़ों से बलगम निकलता है।
अश्वगंधा तीन से पांच ग्राम एक गिलास दूध के साथ सेवन करने से इम्युनिटी बूस्ट होती है।

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