Shani Jayanti pooja vidhi: शाहपुरा जयपुर में 16 मई को शनि जयंती के अवसर पर कई जगहों पर भंडारों का आयोजन किया जाएगा। शाहपुरा और उसके आस पास श्रीमाधोपुर सीकर जिले में भी शनि जयंती पर कई तरह की पूजाएं आयोजित होंगी। शनि की साढ़े शाति वाले लोग इस दिन सबसे पहले जाकर पूजा करना ना भूले। न्याय के देवता शनि देव किसी का बुरा नहीं करते। लेकिन भाग्य और कर्म फलदाता अपने रवैये से सभी को चौंका देते हैं। इंडिया में शनि देव को सभी मानते हैं। शनि देव की साढ़े शाति के तीन चरण होते हैं। तीनों चरण में ही कष्ट भोगना पड़ता है। शनि का वक्री और मार्गी होना कई तरह से व्यक्ति को प्रभावित करता है।
शनि जयंती विशेष
शनि जयंती पर आप तेल का दीपक जला सकते हैं। अजीतगढ़ और शाहपुरा के आसपास में मंदिर भी काफी है। जयपुर, सीकर जिले में लगभग सभी गाँवों में जागरण और हवं पूजन इत्यादि भी होने हैं। काले तिल और सरसों के तेल में दीपक का विशेष महत्त्व है। अपनी दशा को थोड़ा कम करने के लिए आप काले कपडे में काली उड़द भी दान कर सकते हैं। सरसों का तेल चढ़ाते समय सिक्का लोहे का जरूर डालें। शनि मंदिर में ज्यादा से ज्यादा समय निकालें। शनि के लिए आप भार्गव से या पुजारी से जाप भी करा सकते हैं। High volume content
शनि की महिमा
शनि देव को कर्मफल का दाता कहा जाता है। सूर्य पुत्र और सभी देवताओं में विशेष पद प्राप्त शनि देव की दृष्टि से कोई नहीं बच पाया। शनि देव ने रावण को भी हिलाकर रख दिया था। जब हनुमान जी ने शनि देव को रावण के त्याचारों से मुक्त कराया तो शनि देव ने वरदान दिया था। जो बालाजी के भक्त होंगे उन पर कोई आंच नहीं आएगी। शनि देव का भार काम करने के लिए ही तेल चढ़ाया जाता है। शनि देव ने जब रावण के पुत्र मेघनाथ के जन्म पर अपनी दृष्टि तिरछी कर ली थी। रावण विद्वान था और सारे गृह अपने अनुसार ही बिठाये थे। लेकिन शनि की टेढ़ी नजर ने मेघनाथ को अल्पायु बना दिया था।