‘लॉकडाउन’ (Lockdown) एक ऐसा शब्द है, जिसे सुनते ही आज भी लोगों के जहन में कोरोना काल का वो दौर और डर ताजा हो जाता है। हाल ही में सरकार द्वारा लिए गए कुछ कड़े फैसलों को देखकर सोशल मीडिया और आम जनता के बीच एक बार फिर लॉकडाउन जैसी पाबंदियों की चर्चा शुरू हो गई है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उस दौर के संकट और आज के हालात में जमीन-आसमान का अंतर है। कोविड महामारी के समय इंसानी जिंदगी को बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता थी, जिसके लिए लॉकडाउन एकमात्र रास्ता था। वहीं आज की परिस्थिति पूरी तरह से आर्थिक और वैश्विक मोर्चे से जुड़ी हुई है।
दरअसल, मिडिल-ईस्ट (Middle East) में चल रहे युद्ध और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) मार्ग बाधित होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं। तेल महंगा होने से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में ईंधन की कोई किल्लत नहीं है, लेकिन इसके बावजूद देशवासियों को संभलकर इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है।
इस महीने 10 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने संबोधन में जनता से पेट्रोल-डीजल बचाने की भावुक अपील की थी। पीएम मोदी के इस बयान के बाद लोग कोरोना काल की पाबंदियों को याद करने लगे। सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि देश में पूर्ण लॉकडाउन (Total Lockdown) लगाने जैसी कोई नौबत या स्थिति नहीं है। सरकार की तरफ से उठाए जा रहे इन एहतियाती कदमों का एकमात्र मकसद देश के बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को बचाना और तेल की बेतहाशा खपत को नियंत्रित करना है।
1. Mandatory Online Meetings in Financial Sectors
वित्त मंत्रालय के ‘वित्तीय सेवा विभाग’ (DFS) ने देश के सभी सरकारी बैंकों (PSBs), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) और सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों के लिए एक सख्त गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत अब सभी आंतरिक और समीक्षा बैठकें अनिवार्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए आयोजित की जाएंगी। जब तक कोई बेहद गंभीर या आपातकालीन स्थिति न हो, अधिकारियों की फिजिकल मीटिंग्स और यात्राओं पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, ताकि हवाई व सड़क यात्रा में खर्च होने वाले महंगे ईंधन को बचाया जा सके।
2. Government Push for Work From Home Culture
सड़कों पर गाड़ियों के बढ़ते दबाव और रोजाना होने वाली पेट्रोल-डीजल की भारी खपत को रोकने के लिए सरकार एक बार फिर लॉकडाउन के सबसे लोकप्रिय फॉर्मूले यानी ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) को लागू कर रही है। देश के कई राज्यों ने इस दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इसी कड़ी में दिल्ली सरकार ने अपने सरकारी कर्मचारियों के लिए हफ्ते में दो दिन घर से काम करना (Work From Home) अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही सरकार ने निजी कंपनियों (Private Firms) से भी अपील की है कि वे स्वैच्छा से अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम दें, ताकि ईंधन की दैनिक खपत को कम किया जा सके।
3. Strict Restrictions on Gold Imports and Foreign Tourism
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना (Gold) दूसरे देशों से आयात करता है, जिसके भुगतान के लिए देश से बहुत बड़ी मात्रा में डॉलर बाहर जाता है। देश के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और रुपये की सेहत को सुधारने के लिए पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि वे कम से कम एक साल तक शादियों या अन्य विशेष उत्सवों में सोने की खरीदारी से बचें। इस कदम से सोने का आयात घटेगा और बचा हुआ विदेशी मुद्रा भंडार कच्चे तेल जैसे अनिवार्य संकटकालीन सामानों को खरीदने में काम आएगा।
इसी तरह, विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए भारतीयों से विदेशी दौरों और पर्यटन (Foreign Travel) को कुछ समय के लिए टालने की अपील की गई है। चूंकि विदेश यात्रा के दौरान भारतीय रुपये को डॉलर में बदलना पड़ता है, जिससे देश के कोष से डॉलर बाहर जाता है। संकट के इस समय में सरकार की नीति यही है कि देश का एक-एक डॉलर सुरक्षित रहे।
4. Reduction in Official Convoys and Ban on New Vehicles
ईंधन की बचत की शुरुआत शासन और प्रशासन के शीर्ष स्तर से की जा रही है। सभी मंत्रियों, बैंक चेयरमैन, एमडी और वरिष्ठ अधिकारियों के विदेशी दौरों की एक सीमा तय कर दी गई है। इसके अलावा, मंत्रियों और वीआईपी (VIP) लोगों के काफिले में चलने वाली गाड़ियों की संख्या को काफी हद तक घटा दिया गया है, जिसका सबसे ज्यादा असर बीजेपी शासित राज्यों में देखने को मिल रहा है। पर्यावरण और ईंधन दोनों को बचाने के लिए दिल्ली जैसे राज्यों ने अगले 6 महीनों तक किसी भी नए पेट्रोल, डीजल या सीएनजी सरकारी वाहन की खरीद पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। अब सरकारी विभागों को तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।
5. Promotion of Public Transport and Directives on Public Events
लॉकडाउन की तर्ज पर ही अगले तीन महीनों के लिए सरकार के स्तर पर आयोजित होने वाले सभी बड़े सार्वजनिक उत्सवों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भव्य आयोजनों को या तो रद्द कर दिया गया है या आगे के लिए टाल दिया गया है। आम जनता से भी यह पुरजोर आग्रह किया जा रहा है कि वे अपने निजी वाहनों (कार या बाइक) को निकालने के बजाय मेट्रो और बसों जैसे सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) का उपयोग करें। दफ्तर आने-जाने के लिए कारपूलिंग (Carpooling) अपनाने और हफ्ते में कम से कम एक दिन ‘नो-वीकल डे’ (No-Vehicle Day) का पालन करने की सलाह दी जा रही है।