चपरासी भर्ती इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई रद्द, नई लिस्ट जारी

Govt Jobs 2026: राजस्थान की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था से जुड़ी एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। राजस्थान हाई कोर्ट ने प्रदेश की एक बहुत बड़ी भर्ती प्रक्रिया—चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 को लेकर एक बेहद कड़ा और युगांतकारी फैसला सुनाया है। अदालत ने उन सभी आरक्षित और विशेष श्रेणियों की मेरिट लिस्ट को पूरी तरह से निरस्त (रद्द) कर दिया है, जिनमें शून्य (जीरो) या उससे मामूली ज्यादा नंबर लाने वाले अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी के लिए चुन लिया गया था।

जस्टिस आनंद शर्मा की एकल पीठ ने विनोद कुमार नामक अभ्यर्थी की याचिका पर गहराई से सुनवाई करते हुए इस ‘जीरो कट-ऑफ’ वाली चयन सूची को पूरी तरह गैर-संवैधानिक और अनुचित करार दिया है। कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा कि किसी भी सरकारी भर्ती में एक न्यूनतम योग्यता अंक (Minimum Qualifying Marks) तय करना बेहद जरूरी है।

High Court Strict Remarks on Zero Cut Off List

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जाहिर की। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना किसी बुनियादी मानक (Basic Standard) के सरकारी पदों पर नियुक्तियां बांटना पूरी तरह गलत है। ऐसी लचर व्यवस्था से सरकारी नौकरियों की शुचिता, निष्पक्षता और गुणवत्ता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े होते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पद भले ही चतुर्थ श्रेणी (Group D) का क्यों न हो, लेकिन लोक सेवा की गरिमा बनाए रखने के लिए एक न्यूनतम बौद्धिक स्तर या योग्यता का पैमाना होना ही चाहिए। अदालत ने अब चयन बोर्ड को अपने विवेक से न्यूनतम अंक का क्राइटेरिया तय करने की पूरी आजादी दे दी है।

Inside the Courtroom and Bizarre Main Case Arguments

अदालत के भीतर याचिकाकर्ता के वकील हरेंद्र नील ने भर्ती की विसंगतियों को उजागर करते हुए एक बेहद दिलचस्प तर्क पेश किया। उन्होंने पीठ को बताया कि भूतपूर्व सैनिक (ओबीसी) कैटेगरी में एक अभ्यर्थी के नंबर माइनस (ऋणात्मक) में थे। वहीं दूसरी तरफ, बोर्ड ने कई अन्य आरक्षित वर्गों में कट-ऑफ को महज 0.0033 अंक यानी लगभग जीरो पर समेट दिया था। वकील ने दलील दी कि जब शून्य नंबर लाने वाले को सरकारी नौकरी के योग्य माना जा सकता है, तो फिर माइनस नंबर वाले को क्यों नहीं? उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि योग्यता के मामले में जीरो और माइनस अंक वाले उम्मीदवारों में कोई व्यावहारिक अंतर नहीं होता है।

Selection Board Defense and Final Judicial Verdict

इस तीखी जिरह के जवाब में कर्मचारी चयन बोर्ड ने अदालत के सामने एक बेहद अजीब दलील पेश की। बोर्ड ने कहा कि वर्तमान सेवा नियमों में न्यूनतम उत्तीर्ण अंक (पासिंग मार्क्स) का कोई स्पष्ट प्रावधान या रूल नहीं लिखा हुआ है। चूंकि विभाग में पद खाली पड़े हैं, इसलिए वे जीरो अंक लाने वाले आवेदकों को भी नौकरी देने के लिए स्वतंत्र हैं। कार्मिक विभाग ने भी बोर्ड का बचाव करते हुए कहा कि माइनस अंक वाले अभ्यर्थी अत्यंत कमजोर होते हैं, इसलिए उन्हें रोका गया। लेकिन हाई कोर्ट ने इस लचर पैरवी को सिरे से खारिज कर दिया और पूरी चयन सूची को ही कूड़ेदान में डाल दिया।

Affected Categories for Revamped Merit Selection

माननीय न्यायालय के इस कड़े आदेश के बाद भर्ती के तहत आने वाले कई आरक्षित और विशेष वर्गों की चयन सूचियां सीधे तौर पर प्रभावित हुई हैं। मुख्य रूप से जिन श्रेणियों की लिस्ट को रद्द किया गया है, उनमें शामिल हैं:

सामान्य (भूतपूर्व सैनिक / एक्स-सर्विसमैन)

अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी विधवा वर्ग)

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी विधवा वर्ग)

ईडब्ल्यूएस और एमबीसी (विधवा श्रेणी)

सहरिया जनजाति और दिव्यांग (PH) श्रेणी

अब बोर्ड को इन सभी वर्गों के लिए एक नया सम्मानजनक न्यूनतम अंक का बैरियर तय करके नए सिरे से चयन सूची तैयार करनी होगी।

Broad Repercussions on On Going Government Recruitment

यह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती मौजूदा प्रदेश सरकार के कार्यकाल की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी भर्तियों में से एक मानी जा रही थी। अब ऐन वक्त पर मुख्य मेरिट लिस्ट रद्द होने से उन हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर दोबारा संशय के बादल मंडरा गए हैं जिनका चयन इस ‘जीरो फॉर्मूले’ के तहत हो गया था। इस अदालती आदेश के बाद अब पूरी भर्ती प्रक्रिया में कुछ महीनों की देरी होना तय है।

हालांकि, इस फैसले से उन योग्य और होनहार उम्मीदवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है जो कड़ी मेहनत करने के बावजूद महज कुछ अंकों के अंतर से मेरिट लिस्ट में आने से चूक गए थे। अब राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को कार्मिक विभाग के साथ बैठक कर नए नियमों का मसौदा तैयार करना होगा। कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य में होने वाली किसी भी सरकारी परीक्षा के लिए यह फैसला एक नजीर (उदाहरण) बनेगा, जिससे अब ‘जीरो’ नंबर पाकर सरकारी दामाद बनने का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो गया है।

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