EBC Reservation आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 14 फीसदी आरक्षण देने का  किया था वादा .
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EBC Reservation राज्य सरकार एक दशक बीतने के बाद भी गुर्जर आरक्षण का मसला सुलझा नहीं सकी है, वहीं अब विधानसभा चुनाव की नजदीकी के चलते अगड़ी जातियों के वोट लेने के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण का पिटारा खोलने की तैयारी चल रही है। आर्थिक पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट तैयार है और इसे जल्द ही मुख्यमंत्री को पेश किया जाएगा।
भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 14 फीसदी आरक्षण देने का वादा किया था। इसको लेकर समय-समय पर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आंदोलन भी होते रहे हैं। इसके चलते राज्य सरकार ने सितंबर 2015 में आर्थिक पिछड़ा वर्ग आरक्षण कानून को विधानसभा में पारित करवाया और आर्थिक पिछड़ों की पहचान करने के लिए आर्थिक पिछड़ा आयोग बनाया गया। हालांकि अभी तक सरकार इसकी अधिसूचना जारी नहीं कर सकी है।

संविधान में नहीं है प्रावधान EBC Reservation In Govt Jobs
जानकारों का कहना है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण का हाल भी गुर्जरों को दिए पांच फीसदी आरक्षण जैसा होना तय है। एक तो सरकार आरक्षण को 50 फीसदी से अधिक आरक्षण दे नहीं सकती, साथ ही संविधान में आरक्षण का आधार आर्थिक होने का कोई प्रावधान नहीं है। 1991 में केन्द्र की तत्कालीन सरकार ने आर्थिक आधार पर 14 फीसदी आरक्षण देकर 25 सितम्बर 1991 को अधिसूचना जारी की थी। इसे सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों ने अवैध घोषित कर दिया था। इसके बावजूद राज्य सरकार ने 2008 में फिर इसी तरह से 14 फीसदी आरक्षण को लागू करने का प्रयास किया, जिस पर राजस्थान हाइकोर्ट ने रोक लगाई थी।

आर्थिक संपन्नता लाने के लिए नहीं है आरक्षण
अधिवक्ता शोभित तिवारी का कहना है कि संविधान में सामाजिक और शैक्षाणिक पिछड़ेपन के आधार पर ही आरक्षण की बात करता है। यदि आर्थिक रूप से कोई व्यक्ति कमजोर है तो यह पिछड़ेपन के लिए सहायक मापक हो सकता है। पिछड़ेपन का निर्धारण सामाजिक और शैक्षाणिक पिछड़ेपन से ही होगा। आरक्षण पिछड़ों को अगड़ा बनाने की बात करता है, यह आर्थिक रूप से विपन्न लोगों को संपन्न बनाने के लिए नहीं है। राजस्थान में वोटों की राजनीति के खातिर इस तरह के आरक्षण की बात दो बार हो चुकी है, लेकिन इसे सरकार लागू नहीं कर सकी है।

रिपोर्ट तैयार EBC Reservation
आर्थिक पिछड़ा आयोग आयोग ने अपना काम पूरा कर दिया है और इसकी रिपोर्ट तैयार है। अगले कुछ दिनों में रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी, इसके बाद सरकार आरक्षण की अधिकृत घोषणा कर सकती है। 

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