violence in khyber pakhtunkhwa
violence in khyber pakhtunkhwa

बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हुई हिंसा पर अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने चिंता जताते हुए ट्वीट किया और पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया। गनी के ट्वीट के जवाब में पाक विदेश मंत्री ने नाराजगी के साथ बेहद तल्ख टिप्पणी की और कहा कि वह अपने देश पर ध्यान दें तो बेहतर होगा। गनी ने ट्वीट में बलूचिस्तान में प्रदर्शन कर रहे अरमान लोनी की ओर इशारा किया था। लोनी की हाल ही में बलूचिस्तान में प्रदर्शन के दौरान हत्या हुई, परिवार ने इसे पुलिस का काम बताया है।

इस्लामाबाद
अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी ने गुरुवार को खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान हुई हिंसा को लेकर ट्वीट किया। ये दोनों ही पाकिस्तान सेना के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। गनी के बयान पर पाकिस्तान ने भी उन्हें कड़ा पलटवार करते हुए उन्हें अफगानी जनता की समस्याओं को नजर में लाने की नसीहत दे डाली। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बदलते समीकरणों के लिहाज से भी इस घटनाक्रम को प्रमुखता से देखा जा रहा है।

जानें क्या है पूरा मामला
गनी के ट्वीट में ‘खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने वालों पर हुई हिंसा से अफगान सरकार बेहद ही चिंतित है।’ इसके जवाब में पाक के विदेश मंत्री ने बेहद तल्ख प्रतिक्रिया भी दी। उन्होंने कहा, ‘इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान पाकिस्तान की कार्यवाही में सिर्फ हस्तक्षेप करना है।

मामले की जड़ पीछे है
गनी का इशारा इस ट्वीट के जरिए पीटीएम के वरिष्ठ सदस्य अरमान लोनी की हत्या को लेकर था। अरमान लोनी बलूचिस्तान में एक शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे और उसी दौरान उनकी हत्या हो गई। लोनी के परिवार का आरोप है कि पुलिस ने सुनियोजित तरीके से लोनी पर अटैक किया। पश्तून मेबन युवकों की सैन्य कार्रवाई में होने वाली मौत के खिलाफ विरोध और आंदोलन करने वाला संगठन है। इसके साथ ही संगठन इलाके में सुरक्षा के नाम पर बिछाई गई बारुदी सुरंग को हटाने की भी मांग करता है।

बलूचिस्तान में पिछले कई दशकों से हो रहा है पाक सरकार और सेना का विरोध
बलूचिस्तान में पाक सरकार और सैन्य कार्रवाई का विरोध दशकों से हो रहा है। 2016 में प्रकाशित बीबीसी रिपोर्ट के अनुसार, ‘6 साल में 1000 से अधिक शव ऐक्टिविस्ट और हथियारधारी अलगाववादियों के बलूचिस्तान में मिल चुके है। खैबर पख्तूनख्वा में भी पख्तून वर्ग हमेशा से असंतोष जाहिर करता रहा है और खुद को पाकिस्तान से बिलकुल अलग बताता है।’

गनी-कुरैशी के बयान के कई संकेत
अफगान राष्ट्रपति के बयान के पीछे कई राजनीतिक संदेश हैं। यह बयान उस वक्त आया है जब एक दिन पहले ही लंदन में कुरैशी ने यूके सांसदों के साथ अनौपचारिक बैठक में कश्मीर मुद्दा भी उठाया था। बलूचिस्तान में अशांति के हालात का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 2016 में स्वतंत्रता दिवस भाषण में लाल किले की प्राचीर से किया था। पाकिस्तान के आर्थिक लिहाज से बलूचिस्तान बेहद ही अहम है क्योंकि यहां की गैस पाइपलाइन के जरिए देश में 36% गैस उत्पादन होता है। चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर भी बलूचिस्तान के इसी क्षेत्र के ग्वादर पोर्ट में स्थित है। सीपीईसी पाकिस्तान-चीन का महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट है।

Latest News