नई दिल्ली: महिलाओं की उम्र जैसे जैसे बढ़ती है वैसे वैसे उनमं कई शारीरिक परिवर्तन होने शुरू हो जाते है। और 40 की उम्र पार करने के बाद से शारीरिक समस्याएं बढ़ना शुरू हो जाती है। जिसमें सबसे पहले रजोनिवृत्ति की शुरुआत होने लग जाती है।।

रजोनिवृत्ति होने से महिलाओं में एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है। ऐसे में उनमें कई तरह के शारीरिक बदलावों आना शुरू हो जाते है। इस दौरान यदि महिलाएं अपने शरीर के ऊपर ध्यान ना दें तो महिलाओं में कई खतरनाक बीमारी के खतरे अधिक हो जाते है। इसलिए महिलाओं को 40 की उम्र पार करने के बाद से समय-समय पर अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराते रहना चाहिए। आइए जानते है 40 की उम्र के बाद महिलाओं को किस तरह के टेस्ट करवाने चाहिए?

मैमोग्राम

40 वर्ष की आयु पार कर लेने के बाद महिलाएं को मैमोग्राम परीक्षण कराना जरूरी होता है यह एक प्रकार का इमेजिंग परीक्षण है, जो स्तन के ऊतकों में  हो रहे बदलाव का पता लगाता है। बढ़ती उम्र में महिलाओं को स्तन कैंसर के बढ़ने की संभावनाएं सबसे अधिक पी जाती है। इस टेस्ट की मदद से ब्रेस्ट कैंसर या ब्रेस्ट से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का पहले ही पता लगाया जा सकता है।

पैप स्मीयर और एचपीवी परीक्षण

40 की उम्र के बाद महिलाओं को पैप स्मीयर और ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) टेस्ट भी कराना जरूरी होता है। इस टेस्ट से सर्वाइकल कैंसर जी बीमारियों का पता लगाया जा सकता है। इसके बावजूद, एचपीवी परीक्षण कराना भी जरूरी होता है। इस टेस्ट की मदद से सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती चरण का पता असानी से लगाया जा सकता है।

ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा

ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ी एक खतरनाक बीमारी है। जो महिलाओं की बढ़की उम्र से शुरू होती है। खासकर, जो महिलाएं मेनोपॉज से गुजर चुकी हैं उनमें ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा तेजी से बढ़ता है। इस टेस्ट की मदद से महिलाओं की हड्डियों के घनत्व का पता लगाया जा सकता है।

मेनोपॉज

40 की उम्र पार कर लेने के बाद महिलाओं मेनोपॉज की शुरूआत होने लग जाती है। ऐसे में महिलाओं को दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। इसलिए इस उम्र में आप नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराएं और अपना लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराएं।