EV Car Price: देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की रफ्तार को और तेज करने के लिए अब इसके फाइनेंस (लोन) सिस्टम को मजबूत और आसान बनाने की कवायद तेज हो गई है। हालांकि भारतीय बाजारों में ईवी की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन ऑटो एक्सपर्ट्स और उद्योग जगत का मानना है कि जब तक आम आदमी और कमर्शियल ड्राइवरों के लिए लोन की प्रक्रिया सरल नहीं होगी, तब तक इस सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव आना मुश्किल है।
इसी सिलसिले में नीति आयोग की पुरानी सिफारिशों और देश में चार्जिंग स्टेशनों के मौजूदा नेटवर्क को लेकर आ रही ताजा रिपोर्ट नीचे दी गई है:
Directing EV Loans Into Priority Sector Lending
कुछ समय पहले देश के थिंक-टैंक नीति आयोग ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण सिफारिश की थी। इसके तहत ईवी लोन को ‘प्राथमिकता क्षेत्र’ (Priority Sector Lending – PSL) के दायरे में शामिल करने की बात कही गई थी, हालांकि इस पर अब तक पूरी तरह अमल नहीं हो सका है।
ईवी से जुड़े तमाम औद्योगिक संगठन और पर्यावरण विशेषज्ञ लगातार सरकार से इसे लागू करने की मांग कर रहे हैं। ताजा सूत्रों के हवाले से खबर है कि रेगुलेटरी (नियामक) स्तर पर इस विषय पर बेहद गंभीरता से मंथन चल रहा है और जल्द ही रिजर्व बैंक इस संबंध में बड़ा फैसला ले सकता है। फिलहाल स्थिति यह है कि देश के कुछ प्रमुख बैंक पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए निजी इलेक्ट्रिक कारों पर पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के मुकाबले मामूली कम ब्याज दर (Interest Rate) पर लोन ऑफर कर रहे हैं।
Mitigating Credit Access Challenges for Commercial EVs
निजी कारों के इतर, व्यावसायिक इस्तेमाल वाले इलेक्ट्रिक वाहनों—जैसे इलेक्ट्रिक टैक्सी, थ्री-व्हीलर, बस और ट्रकों की खरीदारी के लिए बैंकों से कर्ज मिलना आज भी एक टेढ़ी खीर बना हुआ है। बैंकों से आसानी से फंड मंजूर न होने के कारण छोटे कमर्शियल ड्राइवरों और ई-रिक्शा चालकों को मजबूरन गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) का रुख करना पड़ता है, जहाँ उन्हें काफी ऊंची ब्याज दरें चुकानी पड़ती हैं।
सरकारी बैंक इस बात को साफ तौर पर स्वीकार नहीं कर रहे हैं कि वे कमर्शियल ईवी को लोन देने से क्यों कतरा रहे हैं, लेकिन माना जा रहा है कि गाड़ियों की रीसेल वैल्यू और बैटरी की लाइफ को लेकर अनिश्चितता इसकी मुख्य वजह है। इसी समस्या को दूर करने के लिए अब सरकार लोन प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने की तैयारी में है।
Upgrading Public Charging Infrastructure Across Major States
लोन के साथ-साथ ईवी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ‘रेंज एंग्जायटी’ (बैटरी खत्म होने का डर) की है, जिसे दूर करने के लिए देश भर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries) इस समय सभी राज्य सरकारों के साथ मिलकर हाईवे और शहरी इलाकों में चार्जिंग प्वाइंट्स बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है।
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, पूरे भारत में इस समय 29,000 से अधिक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन सक्रिय हैं। हालांकि, इनमें से करीब 70 प्रतिशत स्टेशन देश के केवल 10 प्रमुख राज्यों तक ही सीमित हैं। देश के चुनिंदा राज्यों में चार्जिंग स्टेशनों की मौजूदा स्थिति इस प्रकार है:
कर्नाटक: इस सूची में सबसे आगे है, जहाँ वर्तमान में सर्वाधिक 5,700 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन मौजूद हैं।
महाराष्ट्र: इस लिस्ट में दूसरे पायदान पर है, जहाँ 3,700 स्टेशन काम कर रहे हैं।
दिल्ली: देश की राजधानी में ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर काफी बेहतर है और यहाँ 1,900 चार्जिंग प्वाइंट्स उपलब्ध हैं।
तमिलनाडु: दक्षिण भारत के इस औद्योगिक राज्य में 1,800 चार्जिंग स्टेशन एक्टिव हैं।
उत्तर प्रदेश: देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में अभी 1,500 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन ही स्थापित हो पाए हैं, जहाँ नेटवर्क को और तेजी से फैलाने की जरूरत है।
सरकार का लक्ष्य आगामी कुछ वर्षों में इन स्टेशनों की संख्या को दोगुना करने का है ताकि छोटे शहरों और ग्रामीण अंचलों में भी लोग बिना किसी डर के इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीद सकें।