किसी भी देश में वहां के निवासियों की जान-माल की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा जाता है व इस सुरक्षा व्यवस्था को नित्य नए तरीकों से बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ मेहनत करते हंै। जिन्हें सामान्य रूप से सेफ्टी मैनेजर, फायर प्रोटेक्शन इंजीनियर, रिस्क मैनेजमेंट कंसल्टेंट जैसे व्यक्ति अंजाम देते हैं। इन सभी पदों पर कार्य करने के लिए किसी को भी इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजमेंट कोर्स की जरूरत होती है।

जरूरी योग्यता
न्यूनतम 12वीं कक्षा पास होना अनिवार्य है। ग्रेजुएट एवं इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले छात्रों को वरीयता दी जाती है। ऐसे छात्र जो पहले से फायर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कार्यरत हैं वे अप्लाई कर सकते हैं। विभिन्न संस्थान पाठ्यक्रम से जुड़े 3, 6 व 12 माह के डिप्लोमा, सर्टिफिकेट, शॉर्टटर्म, पत्राचार व पार्टटाइम कोर्सेज करवाते हैं।

रोजगार के विकल्प
आइटी इंडस्ट्री, माइनिंग, ऑयल इंडस्ट्री, कंस्ट्रक्शन आदि में रोजगार की अधिक संभावनाएं बन रही हैं। कोर्स करने के बाद फायर प्रोटेक्शन इंजीनियर, एन्वायर्नमेंट सेफ्टी मैनेजर, इंजीनियर हाइजीन मैनेजर, सिस्टम सेफ्टी इंजीनियर, ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी सुपरवाइजर के रूप में काम कर सकते हैं। सेफ्टी मैनेजर को शुरू में 25 हजार रुपए प्रति माह तक मिलते हैं। इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फायर, नागपुर से यह कर सकते हैं।

सुरक्षा ही उद्देश्य
कोर्स करने के बाद स्टूडेंट्स को उन सभी बारीकियों से अवगत कराया जाता है जिसमें सुरक्षा के हर संभावित उपाय को बनाए रखने, उनकी मॉनिटरिंग से लेकर उपकरणों की जांच व लोगों की रक्षा आदि शामिल हैं। स्टूडेंट्स को समय-समय पर मॉक ड्रिल भी करवाए जाते हैं। – प्रियंका वर्मा

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